दो दोस्तों ने सोचा क्यों ना गांव से बाहर जाकर व्यापार करा जाए, दोनों अलग-अलग दिशा में चल दिए, शुरुआती दिनों में तो

 
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प्राचीन काल में 2 दोस्त थे जिन्होंने गांव से बाहर जाकर व्यापार करने की योजना बनाई. दोनों अलग-अलग दिशा में चले गए. दोनों का व्यापार शुरुआती दिनों से ही अच्छा चलने लगा. एक दोस्त अपनी सफलता से अहंकारी बन गया. उसने बहुत पैसा कमा लिया. उसका व्यापार तेजी से बढ़ रहा था, जिस वजह से वह लापरवाह हो गया. लेकिन जब मंदी का दौर आया तो उसे बहुत नुकसान हुआ. उसकी सारी पूंजी नष्ट हो गई.

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बर्बाद हुए व्यक्ति ने सोचा मुझे अपने मित्र के पास जाना चाहिए. पता करना चाहिए कि उसके हालात कैसे हैं. वह जब मित्र के पास पहुंचा तो उसने देखा कि उसका मित्र मंदी में भी लाभ कमा रहा है. उसने अपने दोस्त से इसकी वजह पूछी. लाभ में चल रहे व्यक्ति ने कहा- मैं लगातार मेहनत कर रहा हूं. मैंने व्यापार में नई नई चीजें सीखना जारी रखा. सोच समझकर योजनाएं बनाईं. छोटी सी लापरवाही भी नहीं की. मैं सफलता से सीख लेकर आगे बढ़ता हूं और दुबारा वह गलती नहीं रहा था, जिससे हानि हो. इसी वजह से मंदी के दौर में भी मेरा व्यापार अच्छा चल रहा है.

पहला दोस्त समझ गया कि उसने व्यापार में सीखना बंद कर दिया. उसके अंदर अहंकार आ गया. इसी वजह से उसे व्यापार में हानि हुई. उसने अपने मित्र से प्रेरणा लेकर दोबारा से काम शुरू किया और कड़ी मेहनत से उसका व्यापार फिर से चलने लगा.

कहानी से सीख

इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि जब हम सीखना बंद कर देते हैं हमारी तरक्की रुक जाती है. इसीलिए जीवन में कभी भी सीखना बंद नहीं करना चाहिए.

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