पानी की सतह पर कैसे चल पाते हैं कीड़े-मकोड़े, जानिए क्या है इसके पीछे का साइंस ?

 
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अगर आपने तालाबों पर गौर किया होगा तो देखा होगा कि कुछ जीव पानी की सतह पर चलते हैं. पानी के भीतर रहने वाले जीव तैरना जानते हैं. लेकिन बहुत से जीव ऐसे होते हैं जो पानी की सतह पर बहुत तेजी से चलते-भागते हैं. पानी के ऊपर चलना इंसान या जानवरों के बस की बात नहीं है. लेकिन कीड़े-मकोड़े आसानी से पानी की सतह पर दौड़ते भागते हैं, लेकिन डूबते नहीं हैं. क्या आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है. 

इन कीड़ों को वाटर स्ट्राइडर कहा जाता है. इनको जन्म से ही सुपर पावर मिला होता है. यह पानी के ऊपर आराम से रह सकते हैं. आखिर यह कीड़े ऐसा क्यों कर पाते हैं, इसके बारे में आपको उनकी शारीरिक संरचना के बारे में भी जाना होगा.

इनसेक्टोपीडिया के मुताबिक, इन कीड़ों का वजन बहुत ही कम होता है. वह पानी की सतह पर पृष्ठ तनाव को नहीं तोड़ पाते. पृष्ठ तनाव पानी या अन्य द्रव पदार्थों का वो गुण होता है जिसके कारण किसी द्रव की सतह किसी दूसरी सतह की ओर आकर्षित होती है.

पानी का पृष्ठ तनाव दूसरे द्रवों के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है. इस कारण कीड़े- मकोड़े आसानी से पानी की सतह के ऊपर ठहर जाते हैं. कीड़े- मकोड़े का वजन काफी हल्का होता है. इस वजह से कीड़े- मकोड़े पानी की पृष्ठ तनाव को नहीं भेद पाते. पानी की सतह और हवा के अणुओं के बीच संबंध होता है, जो एक-दूसरे की तरफ आंतरिक बल लगाती हैं. 

इस प्रक्रिया में पानी की सतह एक लोचदार झिल्ली नी जैसी लगती है. जब आप पानी में एक तेल की बूंद गिरा दे तो इस स्थिति में बहुत ही पतली परत बनती है. जिस पर पानी का पृष्ठ तनाव साफ देखा जा सकता है. पानी के ऊपर आप अपनी हथेली रखकर भी इसे महसूस कर सकते हैं. 

कुछ कीड़े-मकोड़े जैसे वाटर स्ट्राइडर,मकड़ियां पानी की इसी सतह का इस्तेमाल करती हैं. यह जीव काफी हल्के होते हैं और जिस कारण उन्हें इसका फायदा मिलता है. पानी की सतह पर चलने वाले ज्यादातर कीड़ों के पैर लंबे होते हैं, जो उन्हें छोटे पैरों वाले कीड़ों की तुलना में अपने शरीर के वजन को बहुत अधिक क्षेत्रफल में फैलाने में सहायता प्रदान करते हैं. इस वजह से वो पानी के ऊपर आसानी से दौड़ते हैं

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