क्या कभी सोचा है जब नहीं था रुपया और डॉलर तो लोगों को कैसे दी जाती थी सैलरी 

 
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सैलरी यानी तनख्वाह जो हमारे खाते में हर महीने आती है. हर कर्मचारी को अपनी सैलरी का इंतजार रहता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब दुनिया में रुपया, डॉलर जैसा कुछ नहीं था तो लोगों को सैलरी कैसे दी जाती थी. अगर नहीं तो आज जान लीजिए.

फ्रेंच इतिहासकारों के मुताबिक, दुनिया में सबसे पहली सैलरी 10,000 BCE और 6,000 BCE के बीच दी गई थी. सैलरी के तौर पर तीन चीजों नमक, परमेशियन चीज और फिर कौड़ी का इस्तेमाल हुआ था. 10,000 BCE और 6,000 BCE से पहले सैलरी देने का कोई ट्रेंड नहीं था और ना ही संगठित कर्मचारियों के लिए कोई सिस्टम था.

नमक- प्राचीन रोम में लोगों को सैलरी के तौर पर नमक दिया जाता था. रोमन साम्राज्य में सैनिकों को तनख्वाह के तौर पर एक मुट्ठी नमक दिया जाता था. सैनिक दिन के अंत में काम खत्म करने के बाद नमक लेकर घर लौटते थे, तभी से यह कहाव शुरू हुई- किसी के लिए नमक जितने कीमती बनो. जो सैनिक अच्छा काम करता था, उसे ही नमक दिया जाता था.

परमेशियन चीज- मिडिल एज यानी मध्यकाल में परमेशियन चीज को सैलरी के रूप में देने का ट्रेंड बन गया. तथ्यों के मुताबिक, इटली में आज भी एक बैंक इमिलियानो परमेशियन-रेगियानो चीज को रकम के तौर पर स्‍वीकार करता है. इसे लोन के लिए प्रयोग किया जाता है. एक अनुमान के मुताबिक, बैंक में चीज के 4,30,000 व्‍हील भी रखे हुए हैं.

कौड़‍ियां- सैलरी के रूप में कौड़ियों का चलन एशिया से लेकर अफ्रीका में होता था. 20वीं सदी तक अफ्रीका के कई हिस्सों में कौड़ियों का प्रयोग तनख्‍वाह के लिए होता था. अमेरिका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी कौड़ियों का इस्तेमाल होता था.

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