भारतीय नोट पर कितनी भाषाएं छपी होती हैं क्या जानते हैं आप 

 
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आपने 100, 500 और ₹2000 के नोट देखे होंगे. लेकिन कभी क्या आपने इस बात पर गौर किया है कि हमारे नोटों पर कई भाषाएं छपी होती हैं. पर क्या आप जानते हैं कि भारतीय नोट पर कितनी भाषाएं प्रिंट होती हैं और इतनी भाषाओं को छापने की क्या वजह है. नहीं तो आज जान लीजिए.

नोट पर होती हैं 17 भाषाएं 

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के मुताबिक, एक भारतीय नोट पर 17 भाषाएं प्रिंट होती हैं. हिंदी और इंग्लिश सामने की तरफ होती है, जबकि पीछे की तरफ 15 भाषाएं प्रिंट होती हैं. देश में 22 भाषाएं बोली जाती हैं. लेकिन इनमें से किसी भी भाषा को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा नहीं मिला है. हालांकि फिर भी इन सभी भाषाओं को नोट पर प्राथमिकता दी गई है. 2000 के नोट पर तो ब्रेल लिपि भी छपी होती है, ताकि जो लोग देख नहीं सकते उन्हें कोई परेशानी ना हो.

आजाद भारत का पहला नोट 

भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था और 1950 में गणतंत्र देश बना. भारत में आज जो रुपए का डिजाइन है वह एक रुपए के सिक्के से प्रभावित है. नोट के लिए जो प्रतीक चुना गया है वह सारनाथ स्थित चार मुंह वाले शेर से लिया गया है. आजाद भारत में पहला नोट एक रुपए का था, जो 30 नवंबर 1917 को ब्रिटिश शासनकाल में आया था. 

क्या थी अंग्रेजों के समय की स्थिति  

प्रथम विश्‍व युद्ध में अंग्रेजों का दबदबा था और उस समय एक रुपए का सिक्‍का चांदी के सिक्‍के के तौर पर चलन में था. लेकिन युद्ध की वजह से जब स्थितियां खराब हो गईं तो चांदी के सिक्‍के को ढालना मुश्किल हो गया था. इस वजह से पहली बार लोगों के सामने एक रुपए का नोट आया जिस पर जॉर्ज पंचम की फोटो लगी थी. इस नोट को इंग्‍लैंड में प्रिंट किया गया था. सन् 1917-1918 में हैदराबाद के निजाम को खुद की करेंसी प्रिंट करने और उसे जारी करने का विशेषाधिकार दिया गया था.

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