32 साल पहले पेप्सी कंपनी के पास थी दुनिया की छठी सबसे बड़ी सेना, जानिए आखिर क्यों 

 
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क्या आप जानते हैं कि 1989 में पेप्सी कंपनी के पास दुनिया की छठवीं सबसे बड़ी सेना थी. उस समय पेप्सी के पास 17 पनडुब्बी, एक युद्धपोत, एक क्रूजर और एक विध्वंसक जहाज था. लेकिन क्या आपके दिमाग में यह सवाल उठता है कि आखिर शीतल पेय बनाने वाली एक कंपनी को इतनी भारी मात्रा में युद्ध सामग्री की जरूरत क्यों थी. इसके पीछे की कहानी बहुत ही रोचक है.

दरअसल, 1959 में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच के रिश्ते ठीक नहीं थे. उस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी उत्पादों के लिए मास्को में एक प्रदर्शनी आयोजित कराने का निर्णय किया था और उन्होंने उपराष्ट्रपति को इस काम की जिम्मेदारी सौंपी थी. इस संबंध में अमेरिका के तत्कालीन उपराष्ट्रपति ने सोवियत संघ के प्रधानमंत्री से मुलाकात की.

इस खास मौके पर अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियों जैसे डिज्नी और पेप्सी ने भी प्रदर्शनी में हिस्सा लिया था. अमेरिकी उपराष्ट्रपति और सोवियत संघ के पीएम के बीच किसी बात को लेकर बहस बहुत ज्यादा बढ़ गई, तब पेप्सी कंपनी के उपाध्यक्ष डोनाल्ड केंडल के बीच बचाव कराया था. उन्होंने सोवियत संघ के नेता को पेप्सी का प्याला थमा दिया और उन्हें यह पेय पदार्थ इतना पसंद आया कि उन्होंने पेप्सी को तुरंत सोवियत संघ में प्रवेश की इजाजत दे दी थी.

डोनाल्ड कैंडल का यह कदम कंपनी के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ और कंपनी ने उन्हें सीईओ के रूप में नियुक्त कर लिया. हालांकि उस समय डोनाल्ड कैंडल ने यह डील की थी कि 1985 तक सोवियत संघ में पेप्सी की प्रतिस्पर्धी कंपनी कोका कोला को व्यापार करने की इजाजत नहीं होगी. उस समय रूस ने वोदका और पेप्सी की अदला-बदली करने का फैसला किया था. 

उस समय रूस में वोदका का बहुत भारी मात्रा में उत्पादन होता था. अमेरिका में कुछ समय बाद वोदका की बिक्री में भारी मात्रा में कमी आई. तब रूस के सामने समस्या खड़ी हो गई कि वह पेप्सी को भुगतान कैसे करे. सोवियत सरकार को पेप्सी कंपनी को 3 बिलियन डॉलर चुकाना था. ऐसे में सोवियत सरकार ने शीत युद्ध में इस्तेमाल हुए सैन्य उपकरण गिरवी रखने का निर्णय किया था और उस बकाए को चुकाने के लिए पेप्सी कंपनी को 17 पनडुब्बियां, एक क्रूजर, एक युद्धपोत और एक विध्वंसक दिया था.

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