इन संकेतों से पता है काला जादू है या नहीं, सूर्यग्रहण के दिन होता है सबसे ज्यादा असर 

 
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अक्सर लोग काला जादू और वुडू का नाम सुनते ही का काँपना शुरू कर देते हैं। दरअसल काली शक्तियों का प्रतीक काले जादू को माना जाता है। सच तो यह है कि काला जादू नाम का कुछ नहीं होता। बता दें कि काला जादू एक तरह का मैजिक होता है। व्यक्तिगत लाभ और दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए मैजिक का इस्तेमाल लोग करते हैं। जैसे काला जादू कहा जाता है। इसके अंदर कई प्रकार के टोटके आते हैं। तांत्रिक विद्या के नाम से निकले जादू को जाना जाता है। इसका विस्तार भारत के बौद्ध धर्म के ब्रज यान समुदाय ने किया था।

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व्यक्ति की कुंडली में कुछ दोष होता है। तभी उसके ऊपर काले जादू का असर होता है। अगर सूर्य चंद्र शनि और मंगल विशेष भागों से कुंडली में राहु केतु से पीड़ित होते हैं। सभी उन पर बुरी शक्तियों का खास असर देखने को मिलता है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि काले जादू का असर सूर्य ग्रहण वाले दिन बहुत ज्यादा होता है। दरअसल राशियों की स्थिति में बहुत ज्यादा बदलाव इसी 1 दिन देखने को मिलते हैं।

जब भी काला जादू नाम सुनने में आता है तो बंगाल का ख्याल सबसे पहले मन में आता है। हालांकि यह सच नहीं है अफ्रीका में काले जादू का उपयोग हद से ज्यादा होता है। गुड़िया जैसा प्रतिक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बेसन उड़द की दाल और आटे के बनी चीजों को बनाया जाता है। इसके बाद उसमें जान डालने के लिए मंत्र फुके जाते हैं। उसके बाद काला जादू जिस भी व्यक्ति पर करना होता है। पुतले को जागृत करके उसका नाम लिया जाता है।
 

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