चाणक्य नीति ; रिस्क लेने से ही जीवन में मिलती है सफलता 

 
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आचार्य चाणक्य एक महान नीति थे। इसके साथ ही वह चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। इन्हें कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता था। इन्होने अपनी बुद्धि और कौशल से सब को अपना बनाते थे। आपको  बता दें कि चाणक्य ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बना दिया था। उन्होंने चाणक्य नीति ग्रंथ की रचना की थी चाणक्य ऐसी नीतियों के बारे में बताते हैं जो शायद आपको नहीं पता होगी।

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 चाणक्य कहते हैं कि जो राजा धर्म में आस्था रखता है। वहीं देश के जनमानस को शुभ पहुंचा सकता है इसलिए व्यक्ति को हमेशा सद्विचार और सदाचरण ही अपनाना चाहिए।

जो राजा प्रजा का पालन करने के लिए धन की समुचित व्यवस्था रखता है। और राज्य संचालन के लिए यथोचित कोष एकत्र रखता है उसकी सुरक्षा को कभी भी वह भी भय नही होता।

एक योग्य राजा को सदैव अपने पड़ोसी राज्य के यह तो के बारे में सोचना चाहिए और हमेशा सावधान रहना चाहिए क्योंकि प्राय यह देखा जाता है कि सीमा के निकट वाले राज्य किसी ना किसी बात को लेकर आपस में लड़ रहे होते हैं।

राजनीति यही है कि किसी को भी अपनी गुप्त बातें नहीं बतानी चाहिए क्योंकि यदि आप अपनी किसी को गुप्त बातें बता देते हैं। तो सब कुछ तबाह हो जाता है।

हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हर मित्रता में कोई ना कोई स्वार्थ जरूर छिपा होता है।

आचार्य चाणक इस बात को कहते हैं कि कभी भी रिस्क लेने से नहीं डरना चाहिए। कई बार भविष्य में कुछ अच्छा करने के लिए वर्तमान समय में कुछ बड़े निर्णय लेने पड़ते हैं। यही व्यक्ति निर्णय लेने से डरेगा तो फिर राजनीति में कभी भी सफल नहीं हो पाएगा।

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