पटरी पर कोई इंसान आ जाए या जानवर, फिर भी लोको पायलट नहीं कम करता ट्रेन की स्पीड, जानिए क्यों ?

 
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आपने भी ट्रेनों से सफर किया होगा. आप जब भी ट्रेन को दूर से देखते हैं तो लगता है कि वह बहुत धीरे चल रही है. लेकिन जब ट्रेन सामने से गुजरती है तो उसकी सनसनाती तेजी के सामने अच्छे अच्छों की हवा निकल जाती है. ट्रेन यात्रा के दौरान आपने कई बार देखा होगा कि पटरी पर इंसान या जानवर आ जाते हैं, लेकिन फिर भी ट्रेन रुकती नहीं है, बल्कि उसे रौंद कर चली जाती है. 

क्या आपके मन में भी कभी यह सवाल उठा है कि आखिर लोको पायलट ट्रेन की पटरी पर इंसान या जानवर को देखने के बावजूद ट्रेन को क्यों नहीं रोकता है. आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देने जा रहे हैं.

ट्रेन में लगभग 20-22 होते हैं जो एयर प्रेशर ब्रेक के जरिए एक-दूसरे से जुड़े होते हैं. ट्रेन की औसतन रफ्तार 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे होती है. जब भी ट्रेन को किसी स्टेशन पर रुकना होता है तब ट्रेन ड्राइवर लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर पहले ही ट्रेन की स्पीड को कम करना शुरू कर देता है. हालांकि जंगलों में ऐसा होता है कि 100 मीटर आगे की चीज भी ट्रेन ड्राइवर को नजर नहीं आती. ऐसे में अगर ट्रेन ड्राइवर पटरी पर किसी इंसान या जानवर को देख ले तो वह ब्रेक नहीं लगाता. 

इमरजेंसी ब्रेक लगाने से भी कोई फायदा नहीं होता क्योंकि ट्रेन ब्रेक लगाने के डेढ़ किलोमीटर बाद ही रफ्तार धीमी कर पाती है. वैसे इमरजेंसी की स्थिति में गार्ड भी ब्रेक लगा सकता है. ट्रेन का ड्राइवर वॉकी-टॉकी की मदद से गार्ड को जानकारी दे देता है और वह अपने केबिन में एयर प्रेशर गेज को खोल देगा और ट्रेन में ब्रेक लग जाएंगे.

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