जानिए आखिर क्यों सूर्यास्त से पहले ही क्यों किया जाता है दाह संस्कार

 
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मरणोपरांत व्यक्ति का अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद नहीं किया जाता। पुराणों में इसकी खास वजह बताई गई है गरुड़ पुराण में इसका वर्णन भी किया गया है। पुराणों में इसकी खास वजह बताई गई है आपको बता दें कि इसमें सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार को उचित नहीं माना गया है। अगर किसी की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है तो उसका अंतिम संस्कार रात को नहीं बल्कि दूसरे दिन सूर्यास्त से पहले किया जाता है।

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गरुड़ पुराण के मुताबिक अगर अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद किया जाए तो मरने वाले को परलोक में कष्ट मिलते हैं। अगले जन्म में उसके अंगों में खराबी हो सकती है इसी कारण सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करना उचित नहीं माना गया है।

एक मान्यता यह भी है कि सूर्यास्त के बाद स्वर्ग का द्वार बंद हो जाता है और नरक के द्वार खुल जाते हैं अगर मरने वाले व्यक्ति का अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद किया जाता है तो उसको नर्क में जगह मिलती है।

गरुड़ पुराण के मुताबिक उक्त सभी कार्यों को करने की विशेष स्थिति और नियम होते हैं। रीति और नियम के किए गए कार्य से आस्था और आत्मा को शांति मिलती है और अगले जन्म अर्थात नई शरीर में उसके परिवेश के द्वार खुल जाते हैं। यह स्वर्ग में चला जाता है हिंदू के साधु संत और बच्चों को दफनाया जाता है जबकि सामान्य व्यक्ति का दाह संस्कार किया जाता है।

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