जब पिता की बात को अनसुना कर घर छोड़कर भाग गए थे गांगुली, 7 दिनों तक परिवार से रहे थे दूर

जब पिता की बात को अनसुना कर घर छोड़कर भाग गए थे गांगुली, 7 दिनों तक परिवार से रहे थे दूर
 
जब पिता की बात को अनसुना कर घर छोड़कर भाग गए थे गांगुली, 7 दिनों तक परिवार से रहे थे दूर

सौरव गांगुली की गिनती भारत के सबसे सफल कप्तानों में की जाती है. सौरव गांगुली ने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम को नए मुकाम तक पहुंचाया. वर्तमान में सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष हैं, सौरव गांगुली के क्रिकेट के सफर में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले. इस दौरान उनके घरवालों ने भी उनका पूरा साथ दिया. लेकिन गांगुली ने अपने करियर के दौरान कुछ ऐसा कर दिया था जिसके बाद वो 7 दिन तक अपने घर भी नहीं गए थे. 

जब पिता की बात को अनसुना कर घर छोड़कर भाग गए थे गांगुली, 7 दिनों तक परिवार से रहे थे दूर

गांगुली ने एक करीबी सलाहकार और रिश्तेदार मलय बनर्जी ने ज़ी टीवी के शो पर इस बात का खुलासा किया था, उन्होंने बताया कि जब गांगुली क्लब क्रिकेट खेलते थे तब उन्होंने दूसरे क्लब में खेलने की बात कही. क्योंकि उनके बड़े भाई उस टीम के कप्तान थे. मलय चाहते थे कि गांगुली मोहन बागान में खेले, लेकिन सौरव के पिता ने सपोर्ट यूनियन में उन्हें भेजने की तैयारी कर ली थी, जिसमें उनके बड़े भाई स्नेहाशीष भी थे. 

1992 की बात है उस समय गांगुली राजस्थान क्लब के लिए खेल रहे थे, मलय ने बताया कि वो उस समय मोहन बागान क्लब के लिए खेल रहा था. मैं अपना क्रिकेट करियर खत्म करने वाला था. हम लोगों ने सोचा कि सौरव को मोहन बागान के लिए साइन करवाएंगे. मैं उनके घर गया, मैंने उनसे अपील की कि आप आओ मोहन बागान से खेलो, उन्होंने कहा- यह संभव नहीं है. स्पोर्टिंग यूनियन को अपनी जबान दे दी है. मेरे बड़े भाई वहां के कप्तान हैं. इसलिए मैं ऐसा नहीं कर पाऊंगा. 

मैंने कहा-  यार मोहन बगान बड़ा क्लब है. आप वहां पेशेवर बन जाओगे, पैसा भी मिलेगा. सौरभ ने कहा कि कल देखते हैं क्या करना है. आगे मलय ले ने बताया कि सौरव गांगुली अगले दिन कॉलेज से ही फरार हो गए थे और 7 दिनों तक अपने घर भी नहीं लौटे थे. मैंने कहा- मैं अगले दिन उनके घर गया मैंने उनसे कहा कि साइन करने की तारीख जब है. तुम उस दिन कॉलेज के बाहर मेरा इंतजार करना. उनका कॉलेज सुबह का होता था, मैं सुबह जल्दी उनके कॉलेज गया. यो आगे के गेट से कॉलेज में घुसे और हम पिछले गेट पर उनका इंतजार कर रहे थे. हमने उन्हें लिया और हम चले गए, अगले 7 दिन वो अपने घर नहीं गए. इसमें बड़ा हाथ पूर्व क्रिकेटर अरुण लाल का था, सौरव गांगुली 7 दिनों तक उन्हीं के घर रुके थे.

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