क्रिकेट इतिहास के वो 7 नियम जिन्हें ICC को करना पड़ा समाप्त, साबित हुए सुपर फ्लॉप

क्रिकेट इतिहास के वो 7 नियम जिन्हें ICC को करना पड़ा समाप्त, साबित हुए सुपर फ्लॉप
 
क्रिकेट इतिहास के वो 7 नियम जिन्हें ICC को करना पड़ा समाप्त, साबित हुए सुपर फ्लॉप

भारत में क्रिकेट को काफी पसंद किया जाता है दुनिया भर में भारत दुनिया भर में भारत में सबसे ज्यादा क्रिकेट के प्रशंसक हैं आईसीसी समय-समय पर क्रिकेट की लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए नए नए एक्सपेरिमेंट भी करता है लेकिन कुछ एक्सपेरिमेंट फेल हो जाते हैं और फ्लॉप साबित होते हैं आज हम आपको क्रिकेट इतिहास के उन्हीं 7 नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि सुपर फ्लॉप साबित हुए और आईसीसी को इन नियमों को समाप्त करना पड़ा.

क्रिकेट इतिहास के वो 7 नियम जिन्हें ICC को करना पड़ा समाप्त, साबित हुए सुपर फ्लॉप

सुपरसब

इसे हम सुपर सब्स्टीट्यूट भी कहते हैं. 2005 में पहली बार इसे क्रिकेट के नियमों में शामिल किया गया. इस नियम के अनुसार प्रत्येक टीम एक सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी रखती थी. जिसका फैसला कप्तान को टॉस से पहले लेता था और मैच के दौरान कभी भी कप्तान उस खिलाड़ी को टीम में शामिल कर सकता था. वह खिलाड़ी बल्लेबाजी, फील्डिंग, विकेटकीपिंग, गेंदबाजी कर सकता था. सुपरसब के नियम 12वें खिलाड़ी के नियम से बिल्कुल अलग है. 12वां खिलाड़ी सुपर सब की तरह बल्लेबाजी और गेंदबाजी नहीं कर सकता. हालांकि इस नियम का विश्व के कप्तानों ने जमकर विरोध किया. 2005 में ही इस नियम को खत्म करने के लिए कई अंतर्राष्ट्रीय कप्तानों ने “जेंटलमैन समझौता” समझौता किया. फरवरी 2006 को आईसीसी ने इस नियम को समाप्त करने की घोषणा की.

45 ओवर का मैच 

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया 2010 में 45 ओवर का अनोखे मैच का आईडिया लेकर आई थी. इस फॉर्मेट के तहत दोनों पारियों में 20 ओवर का होता था. जैसे एक पारी हो जाती तो दूसरी पारी 25 ओवर की होती थी. लेकिन यह फार्मूला सफल नहीं हुआ.

सुपर टेस्ट

2005 में आईसीसी ने सिडनी में ऑस्ट्रेलिया और विश्व एकादश के बीच सुपर टेस्ट मैच का आयोजन करवाया था. यह मैंच 6 दिनों तक खेला गया. लेकिन यह फ्लॉप साबित रहा.

बारिश पर नियम

1992 के विश्व कप में बारिश से प्रभावित मैचों के लिए रेन रुल लाया गया. यह नियम पहले बैटिंग करने वाली टीम के लिए बड़ी मुसीबत था .इस नियम के कारण विश्व कप सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका की टीम को हार का सामना करना पड़ा. इस नियम के कारण काफी मैच विवादों से भरे रहे. लेकिन बाद में डकवर्थ लुईस ने इसकी जगह ले ली.

त्रिकोणीय टेस्ट सीरीज

र्तमान में क्रिकेट में द्विपक्षीय सीरीज खेली जाती है. लेकिन 1912 में पहली बार त्रिकोणीय टेस्ट सीरीज टेस्ट सीरीज खेली गई थी. इस सीरीज में 3 टीमें शामिल थी. ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड पहली बार इन तीनों देशों के बीच टेस्ट सीरीज खेली गई. इन तीनों टीमों के बीच 9 मैच खेले गए. हालांकि यह त्रिकोणीय टेस्ट सीरीज असफल रही. 2012 के बाद यह सीरीज को कभी भी दोबारा वापस नहीं खेली गई.

बॉल आऊट

फरवरी 2016 में पहली बार इस नियम को शामिल किया गया. इस नियम के तहत दोनों टीमें मैच टाई होने पर 5-5 बॉल डालती थी. जो टीम सबसे ज्यादा स्टम्प करती थी, वह विजेता घोषित होती थी. 2007 के टी-20 विश्व कप में भारतीय टीम ने इसी प्रकार पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था. हालांकि अब इस नियम की जगह पर सुपर ओवर खेला जाता है.

सुपर मैक्स

इस अनोखे नियम का इस्तेमाल न्यूजीलैंड T-20 क्रिकेट के लिए किया गया था. हालांकि बाद में इसे लागू नहीं किया गया. इस नियम के मुताबिक दोनों टीमें 0-10 ओवर की दो इनिंग खेलती थी. इसमें वाइड के दो रन थे और इसमें तीन की जगह चार स्टम्प को शामिल किया गया था.

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