ये हैं दुनिया की 8 सबसे खतरनाक कमांडोज, जानकर हर भारतीय को होगा गर्व

ये हैं दुनिया की 8 सबसे खतरनाक कमांडोज, जानकर हर भारतीय को होगा गर्व
 
ये हैं दुनिया की 8 सबसे खतरनाक कमांडोज, जानकर हर भारतीय को होगा गर्व

किसी भी देश को ताकतवर बनाने के पीछे अगर सबसे बड़ा हाथ किसी का होता है तो वो है स्पेशल फोर्सेस। जी हां, दरअसल सैन्य और रक्षा बल की वजह से ही कोई देश विश्व में एक अलग पहचान बनाता है। किसी भी अन्य देश की तरह भारत में भी देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन्हीं जवानों के हाथों में होती है। आज के भारत की बात करें तो यह आतंकी हमले से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

ये हैं दुनिया की 8 सबसे खतरनाक कमांडोज, जानकर हर भारतीय को होगा गर्व

.मार्कोस मरीन कमांडो

मार्कोस कमांडो को सबसे कड़ा एवं मजबूत माना जाता है। दरअसल ऐसा इसलिए है क्योंकि कमांडो को शारीरिक और मानसिक रूप से ऐसी ट्रैनिंग दी जाती है जिनके कारण वो बेहद ही मजबूत होते हैं। बता दें कि इन्हें दाढ़ीवाला फौज के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल दाढ़ीवाला सशस्त्र बल का मतलब होता है कि आतंकवादियों द्वारा आम क्षेत्र में मार्कोस किसी भी प्रकार के क्षेत्र में संचालन के लिए एकदम फिट होते है।

2. पैरा कमांडो

आपको बता दें कि भारतीय आर्मी की सबसे ज्यादा प्रशिक्षित स्पेशल फोर्स मानी जाती है पैरा कमांडोज। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेना के सिर्फ उन्हीं जवानों को इस फोर्स का हिस्सा बनाया जाता है जो शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह से स्वस्थ और बहादूर होते हैं। इन कमांडो को एंटी टेरर ऑपरेशन और दुश्मन को तबाह करने जैसे मुश्किल कार्य दिए जाते हैं।

3. गरुड़ कमांडो

ये वायुसेना का एक हिस्सा है। इन्हें गरुड़ कमांडो कहा जाता है। आपको बता दें कि यह फोर्स ये देश की सबसे अत्याधुनिक और प्रशिक्षित कमांडो फोर्स है। बता दें कि इसमें अभी 2000 कमांडो शामिल है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस फोर्स का हवाई क्षेत्र में हमला करने, रेस्क्यू ऑपरेशन आदि के लिए तैयार किया जाता है।

4. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानि NSG

NSG का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में आतंकवादी गातिविधियों को निष्क्रिय करने जैसे कार्यो में इस्तेमाल किया जाता है। इनकी सबसे बड़ी खूबी ये है कि इन्हें खुद से ज्यादा अपने साथी पर यकीन होता है क्योंकि आतंकियों को कवर करने के लिए इन्हें एक-दूसरे का साथ सबसे ज्यादा जरूरी होता है। आपको याद दिला दें कि 2008 में मुम्बई में हुए आतंकी हमलों में इनका इस्तेमाल किया गया था।

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