बर्फ तो ठंडी होती है तो फिर उसमें से भाप क्यों निकलती है

बर्फ तो ठंडी होती है तो फिर उसमें से भाप क्यों निकलती है
 
बर्फ तो ठंडी होती है तो फिर उसमें से भाप क्यों निकलती है

पानी को जमा कर हम बर्फ बना देते हैं। पानी से बर्फ बनाने की प्रक्रिया तब शुरू होती है। जब तापमान चुने लगता है। यानी जब ठंड बढ़ती है और हाथ से छूने पर भी है साफ होता है और विज्ञान के सभी सूत्र इस बात को कहते हैं कि बर्फ ठंडी होती है। सवाल यह है कि जब बर्फ ठंडी होती है तो उसमें से गर्म पानी की तरह भाग क्यों नहीं निकलती है।

बर्फ तो ठंडी होती है तो फिर उसमें से भाप क्यों निकलती है

भारत की नौसेना से रिटायर हुए श्री कमल कुमार घोष बताते हैं कि बर्फ जल का कठिन रूप होती है और उसका तापमान 6 डिग्री सेल्सियस होता है जब वायुमंडल के इस वर्ष में आती है तो उसके आसपास के माहौल में तापमान प्रभावित होता है। वहीं बाहरी हिस्से की बर्फ पिघलने लगता है यह भाव और कुछ भी नहीं है। बल्कि जलीय वास्प ही हैं। जैसे हम अपने रसोईघर में पानी उबालते समय वाष्पीकरण के प्रत्यक्ष प्रमाण देख सकते हैं धीरे-धीरे घनीभूत वाष्प वहां आसपास के वायुमंडल ओं स्थानों से फैल जाते हैं और अध्यक्ष भी हो जाते हैं और बादल तो भाजपा में ही घनीभूत रूप है।

पहले शून्य डिग्री के बर्फ से 0 डिग्री के जल में रूपांतरण होने के लिए प्रति ग्राम वर्ष 80 कैलोरी ऊर्जा चाहिए। इसे बर्फ के लेटेन्ट हिट कहा जाता हैं।आपको बता दें कि पक्षांतर 0 डिग्री के जल को भी कठिन बरस में परिवर्तित होने के लिए 80 कैलोरी ऊर्जा पड़ता है। या केवल वर्ग तक सीमित नहीं है अधिकतर लोगों को ऐसा लगता है कि बर्फ पिघलाने या 0 डिग्री तापमान में जलाशय से वशीकरण नहीं हो सकता। परंतु यह सही नहीं है जल शून्य तापमान में भी जलीय बास पानी की भाप बन जाते हैं।

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