क्रिकेटर बनने से पहले ऐसे गुजारा किया करते थे ये स्टार खिलाड़ी, आज कमाते हैं करोड़ों

क्रिकेटर बनने से पहले ऐसे गुजारा किया करते थे ये स्टार खिलाड़ी, आज कमाते हैं करोड़ों
 
क्रिकेटर बनने से पहले ऐसे गुजारा किया करते थे ये स्टार खिलाड़ी, आज कमाते हैं करोड़ों

ऐसा कहा जाता है कि क्रिकेट अमीरों का खेल है. लेकिन टीम इंडिया में कई ऐसे खिलाड़ी हुए जिन्होंने गरीबी को पीछे छोड़ते हुए अपने सपने को साकार किया और साबित कर दिखाया कि खेल में प्रतिभा मायने रखती है ना कि पैसा. आज हम आपको टीम इंडिया के उन खिलाड़ियों के बारे में बता रहे हैं जो कि क्रिकेटर बनने से पहले कुछ और काम किया करते थे. 

क्रिकेटर बनने से पहले ऐसे गुजारा किया करते थे ये स्टार खिलाड़ी, आज कमाते हैं करोड़ों

रविंद्र जडेजा 

भारतीय टीम के स्टार ऑलराउंडर खिलाड़ी रविंद्र जडेजा के घर की स्थिति खराब थी. रविंद्र जडेजा के पिता वॉचमैन का काम करते थे. जडेजा ने अपनी मेहनत के दम पर टीम इंडिया में जगह बनाई. 

भुवनेश्वर कुमार 

भारतीय टीम के बेहतरीन गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार मेरठ के सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनके पिता सब इंस्पेक्टर थे. घर की स्थिति अच्छी नहीं थी. लेकिन भुवनेश्वर कुमार ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के दम पर टीम इंडिया में जगह बनाई, आज भुवनेश्वर कुमार अपनी स्विंग से बल्लेबाजों को परेशान करने की क्षमता रखते हैं. 

मोहम्मद शमी 

भारतीय टीम के स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी उत्तर प्रदेश के सहसपुर गांव में रहते थे. यहीं पर उनका बचपन गुजरा. मोहम्मद शमी के पिता खेतों में काम करते थे. लेकिन शमी ने अपनी एक अलग पहचान बनाने की ठानी. उनके गांव में क्रिकेट की तैयारियों के लिए कोई सुविधा नहीं थी, जिसके बाद उधार लेकर उन्हें कोचिंग के लिए कोलकाता भेजा गया. शमी ने मेहनत की और आज वो टीम इंडिया के बेहतरीन गेंदबाज है.

उमेश यादव 

उमेश यादव के पिता कोयले की खान में काम किया करते थे. मुश्किल से उनके परिवार का गुजारा होता था. उमेश यादव ने कड़ी मेहनत की और टीम इंडिया में शामिल हुए. 

मुनाफ पटेल 

भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मुनाफ पटेल का जन्म गुजरात के भरूच जिले में हुआ था. उनका परिवार काफी गरीब था. उनके पिता कपास के खेतों में मजदूरी करते थे. अपने खेतों में खेलते-खेलते मुनाफ पटेल ने अपनी गेंदबाजी को तराशा और टीम इंडिया में जगह बनाई. 

मनोज तिवारी

भले ही मनोज तिवारी टीम इंडिया में जगह पक्की ना कर पाए हो. लेकिन उनकी बल्लेबाजी का हर कोई कायल है. मनोज के पिता रेलवे स्टेशन पर एक छोटी सी दुकान चलाते थे. मनोज तिवारी को वहां कई बार काम करना पड़ता था. मनोज तिवारी के बड़े भाई ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्होंने लोन लेकर उनका दाखिला क्रिकेट क्लब में करवाया.

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