एक चोर धर्म के मार्ग पर चलने के लिए गांव के विद्वान संत के पास पहुंचा और उनसे बोला- मुझे आप अपना शिष्य बना लीजिए, मैं एक

एक चोर धर्म के मार्ग पर चलने के लिए गांव के विद्वान संत के पास पहुंचा और उनसे बोला- मुझे आप अपना शिष्य बना लीजिए, मैं एक
 
एक चोर धर्म के मार्ग पर चलने के लिए गांव के विद्वान संत के पास पहुंचा और उनसे बोला- मुझे आप अपना शिष्य बना लीजिए, मैं एक

एक चोर धर्म के मार्ग पर चलना चाहता था. वह अपने गांव के विद्वान संत के पास गया और बोला- मुझे अपना शिष्य बना लीजिए. मैं एक चोर हूं और चोरी करना नहीं छोड़ सकता, क्योंकि यह मेरा काम है. संत ने चोर से कहा- ठीक है तो आज से मैं तेरा गुरु हूं. लेकिन मेरी एक बात हमेशा ध्यान रखना, महिलाओं का सम्मान करना. महिलाओं को माता और बहन समझना. चोर ने गुरु की इस बात को अपने जीवन में उतार लिया.

एक चोर धर्म के मार्ग पर चलने के लिए गांव के विद्वान संत के पास पहुंचा और उनसे बोला- मुझे आप अपना शिष्य बना लीजिए, मैं एक

गुरु-शिष्य जिस राज्य में रहते थे, उस राज्य के राजा की कोई संतान नहीं थी. इसी वजह से राजा अपनी रानी से गुस्सा था. उसने रानी के अलग रहने की व्यवस्था करवा दी. नया-नया शिष्य बना चोर चोरी करने राज्य की रानी के महल में घुस गया. रानी ने देखा कि महल में चोर घुस आया है. महल के चौकीदारों ने भी चोर को देख लिया और उन्होंने राजा को सूचित कर दिया. राजा तुरंत ही वहां पहुंच गए.

राजा ने देखा कि रानी चोर से बातें कर रही है. रानी ने चोर से कहा- तू यहां कैसे आया है. चोर ने कहा- मैं घोड़े से आया हूं. रानी ने कहा- मैं तेरे घोड़े को सोने-चांदी से लदवा दूंगी. बस मेरी एक इच्छा पूरी कर दे. चोर ने कहा- आप मेरी मां समान है. मुझे पुत्र समझ कर अपनी बताएं. मैं चोर हूं, लेकिन मेरे बस में होगा तो मैं जरूर पूरी करूंगा. रानी ने कहा- तू अब से चोरी मत करना. 

चोर ने गुरु से कहा था कि वह महिलाओं का सम्मान करेगा, इसीलिए उसने रानी की बात मान ली और चोरी ना करने का संकल्प लिया. राजा यह सारी बातें सुन रहा था. राजा यह बात सुनकर खुश हो गया. उसने चोर को दरवार में बुलाया और कहा- तूने मेरी रानी से जो बात की है उससे मैं प्रसन्न हूं. तू जो चाहे मांग ले.

चोर ने राजा से कहा- राजन आप महारानी को अब से अपने महल में ही रखें. उन्हें दुख ना दे. राजा ने चोर की यह बात मान ली. राजा ने महारानी से भी क्षमा मांग ली. रानी ने राजा से कहा- हमारा कोई पुत्र नहीं है. हम इस चोर को अपना पुत्र बना लेते हैं. राजा इस बात के लिए राजी हो गया और उसने चोर को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया.

कहानी की सीख

अच्छी बातें जीवन में उतारने से बुरी आदतों को बदला जा सकता है. चोर चोरी करता था, लेकिन उसने गुरु के उपदेश को याद रखा और राजा-रानी उससे प्रसन्न हो गए. इस तरह एक चोर का जीवन बदल गया.

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