जानिए आखिर क्या होता है राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में अंतर

राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान देश की उन धरोहरों में से एक है। जिससे देश की पहचान जुड़ी हुई है। प्रत्येक राष्ट्र के राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान की भावनाएं भले ही अलग-अलग हैं। लेकिन उनमें राष्ट्रभक्ति की भावना होती है और अभिव्यक्ति होती है। स्वतंत्र दिवस के 74 वीं वर्षगांठ के मौके पर आज हम आपको बताने वाले
 
जानिए आखिर क्या होता है राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में अंतर

राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान देश की उन धरोहरों में से एक है। जिससे देश की पहचान जुड़ी हुई है। प्रत्येक राष्ट्र के राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान की भावनाएं भले ही अलग-अलग हैं। लेकिन उनमें राष्ट्रभक्ति की भावना होती है और अभिव्यक्ति होती है। स्वतंत्र दिवस के 74 वीं वर्षगांठ के मौके पर आज हम आपको बताने वाले हैं कि भारत के राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के बारे में।

जानिए आखिर क्या होता है राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में अंतर

जिसको लेकर अक्सर लोग काफी ज्यादा संशय में पड़ जाते हैं दरअसल दोनों के प्रति लोगों के मन में सम्मान का भाव रहता है। लेकिन कई बार लोग ठीक से बता ही नहीं पाते। तो चलिए आज हम आपको इसके बीच के अंतर के बारे में बताएंगे।

क्या है भारत का राष्ट्रगान?
जन-गण-मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता। पंजाब-सिंधु-गुजरात-मराठा द्राविड़-उत्कल-बंग विंध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशीष मांगे गाहे तव जय-गाथा। जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत भाग्य विधाता। जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।

अधिकतर लोगों को यह नहीं पता होता कि राष्ट्रगान बजते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए। दरअसल राष्ट्रगान जब भी कहीं बजाया जाता है तो देश के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होता है कि वह जहाँ भी बैठा हुआ है तो तुरंत अपनी जगह पर खड़ा हो जाए और सावधान मुद्रा में खड़ा रहे साथ ही नागरिकों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वह साथ-साथ उस राष्ट्रगान को दोहराए।

वैसे तो राशि का मूल रूप से बंगला भाषा में लिखा हुआ है जिसमें चंद का भी नाम था लेकिन बाद में इसमें संशोधन कर जिंदगी जगह को सिंधु कर दिया गया क्योंकि देश के विभाजन के बाद सिंध पाकिस्तान का एक अंग हो चुका है।

भारत का राष्ट्रगीत वंदे मातरम है इसके रचयिता बंकिमचंद्र जी हैं। उन्होंने इसकी रचना साल 1882 में संस्कृत और बांग्ला में मिश्रित भाषा में की थी यह स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत दी बना था। इसे भी भारत और राष्ट्रगान जन गण मन के बराबर समझा जाता है। इसे पहली बार साल 18 86 में भारतीय राष्ट्र कांग्रेस के सत्र में लाया गया था। राष्ट्रगीत की अवधि लगभग 52 सेकंड की है राष्ट्रगीत कुछ इस प्रकार है।

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्!
शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥

आपको बता दें कि वंदे मातरम पर भी विवाद बहुत पहले ही से ही चला रहा है इसका चयन राष्ट्रगान के तौर पर हो सकता था। लेकिन कुछ मुस्लिमों के विरोध के कारण में राष्ट्रगान का दर्जा नहीं मिल पाया। दरअसल मुस्लिमों का कहना है कि इस गीत में मां दुर्गा की वंदना की गई है। और उन्हें राष्ट्र के स्वरूप में देखा गया है। जबकि इस्लाम में किसी व्यक्ति या किसी वस्तु की पूजा करना गलत माना गया है

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