जानिए आखिर कुछ अलग तरह की आवाजें हमको सबसे ज्यादा क्यों प्रभावित करती हैं

अगर आप कोई डरावनी फिल्में आवाज म्यूट करके देखते हैं तो डरावने से डरावने दृश्य भी आप को नहीं डराते हैं। बल्कि कुछ समय बाद यह फिल्म आपको बोर करने लगने लगती है। वही इस काम को उल्टा करके देखें सीन देखना बंद कर केवल आवाज सुने तो यह डर और ज्यादा लगता है। लेकिन
 
जानिए आखिर कुछ अलग तरह की आवाजें हमको सबसे ज्यादा क्यों प्रभावित करती हैं

अगर आप कोई डरावनी फिल्में आवाज म्यूट करके देखते हैं तो डरावने से डरावने दृश्य भी आप को नहीं डराते हैं। बल्कि कुछ समय बाद यह फिल्म आपको बोर करने लगने लगती है। वही इस काम को उल्टा करके देखें सीन देखना बंद कर केवल आवाज सुने तो यह डर और ज्यादा लगता है। लेकिन खत्म नहीं होता यानी डरावनी फिल्म से ज्यादा उसकी आवाज हमें डराती हैं। वैज्ञानिकों ने इस पर कई सारे सर्वें किए हैं।

जानिए आखिर कुछ अलग तरह की आवाजें हमको सबसे ज्यादा क्यों प्रभावित करती हैं

कोई भी संगीत हमें सुकून देने के साथ साथ इंजॉय करने में भी मदद करता है। लेकिन लेकिन किसी संगीत में कुछ उतार-चढ़ावों के कारण इतना डरावना क्यों लगने लगता है? कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेनियल ब्लमस्टीन ने इसको लेकर कई सालों तक शोध किया जिसके नतीजे वैज्ञानिक जनरल बायोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित किए गए। इस शोध के मुताबिक यह खास पैटर्न की आवाज को नॉनलीनियर साउंड कहा जाता है जो इंसानों में डर को पैदा करती है।

संगीत के शोधकर्ताओं का मानना है कि कुछ खास गीतों का कॉन्बिनेशन हमारे कानों और दिमाग को विचलित करता है। ट्राई जोन भी इसी तरह के गानों का कॉमिनेशन है जिसे संगीत की दुनिया का शैतान कहा जाता है। इस तरह की धुन से दिमाग का वह स्थान ज्यादा उत्तेजित हो जाता है। जो हमारे डर और असुरक्षा की भावना को कंट्रोल करता है।

कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेनियल के मुताबिक किसी भी तरह की नॉनलीनियर आवाज डरावनी ही होती है। इन आवाजों को सुनने के बाद इंसानों में एक तरह का तनाव पैदा होता है। जो आपके डर की तरह सामने आता है। हालाकिं इस बात को साबित करने के लिए वैज्ञानिकों की टीम में 100 से ज्यादा साउंडट्रेक का अध्ययन किया है। जिसमें युद्ध ड्रामा हॉरर और एडवेंचर से जुड़ी कई सारी आवाज दी गई थी।

आपको बता दें कि यह साउंड सामान्य रेंज से काफी ऊंची आवाज होती है तो साधारण तौर पर जानवरों के वोकल कॉर्ड से ही निकलती है। यह साउंड तो जानवरों को किसी असुरक्षा में सचेत करता है, लेकिन इंसानी मस्तिष्क में इसकी वजह से डर के हार्मोन का स्त्रावण होता है। आवाज से होने वाले डर का भी दो तरह से प्रभाव पड़ता है। अगर हम चिड़ियाघर के शेर की आवाज सुनकर डर जाएं। तो यह डर ज्यादा देर तक नहीं रहता। लेकिन वही हम अंधेरे में किसी आवाज को सुन ले तो वह हमारे जहन में डर पैदा करता है।

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