किसान नेता राकेश टिकैत ने मोदी सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, बोले- सरकार के पास है केवल 30 दिन का समय

 
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बीते 1 साल से दिल्ली-उत्तर प्रदेश के गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का धरना लगातार जारी है. इस धरने की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मोदी सरकार के सामने दिल्ली बॉर्डर को खाली करने के लिए नई शर्त रखी है. उन्होंने इशारों-इशारों में ही सरकार को अल्टीमेटम दिया है. राकेश टिकैत ने साफ शब्दों में कहा कि अगले साल 26 जनवरी से पहले तक की किसानों की सभी बची हुई मांगे मान ली जाएगी तो वह दिल्ली एनसीआर के चारों बॉर्डर को खाली कर चले जाएंगे.

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बुधवार को गाजियाबाद के सदर गांव में बातचीत के दौरान राकेश टिकैत ने कहा- केंद्र सरकार ने घोषणा की है तो वह प्रस्ताव वापस ला सकते हैं. लेकिन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और 700 किसानों की मृत्यु भी हमारा मुद्दा है. इस पर भी सरकार को बात करनी चाहिए. 26 जनवरी से पहले यदि सरकार मान जाती है तो हम चले जाएंगे. चुनाव के बारे में हम आचार संहिता लगने के बाद ही बताएंगे.

आगे टिकैत ने कहा- संघर्ष से ही समाधान का रास्ता मिला है. तभी सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया है. सरकार के पास 35 दिन का समय है. घोषणा पत्र के मुताबिक सरकार जनवरी 2022 में किसानों की आय दोगुनी करने वाली थी, जो कि नहीं कर सकी. 1 जनवरी से किसानों की मांग में यह मांग भी जुड़ जाएगी. राकेश टिकैत ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया है. साथ ही उन्होंने हमारा जिला हमारा कलेक्ट्रेट का नारा देते हुए कलेक्ट्रेट को घेरने की बात कही.

राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की मांग एमएसपी गारंटी कानून है. किसानों पर दर्ज हुए मुकदमे वापस लिए जाएं. बिजली अमेंडमेंट बिल की है, जिसको सरकार ने अभी तक वापस नहीं लिया है. तीन प्रति कानून जो सरकार में वापस लिए हैं वह किसानों के हित में नहीं थे. किसानों की हित की लड़ाई अभी भी जारी है.

बता दें कि किसान संगठनों की 6 मांगे हैं, जिनमें केंद्र सरकार के प्रतिनिधि किसान संगठन मोर्चा से बात करें. किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने के लिए मांग की है. साथ ही प्रदर्शनकारी हजारों किसानों और नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं. लखीमपुर खीरी कांड के पीड़ितों को न्याय मिले और दोषियों पर कार्यवाही हो. बिजली बिल का मुद्दा और वायु प्रदूषण को लेकर जो मुद्दा है वह पराली से जुड़ा हुआ है.

राकेश टिकैत ने कहा कि उन्होंने बिल वापस लिए, लेकिन एमएसपी पर कानून लेकर नहीं आए. हमारा कहना है कि जो भी किया है वह ठीक है. लेकिन आगे की बातचीत पर सरकार रास्ता खोलें. संसद सत्र में कानून वापस होने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे. कई मसले हैं जिन पर सरकार को बात करनी चाहिए. पीएम मोदी ने तीन कानून वापस लिए, इसके लिए धन्यवाद है.

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