स्कूल हो गए बंद तो प्रेग्नेंट होने लगी कम उम्र की लड़कियां, सरकार के उड़ गए होश

 
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कोरोना महामारी का प्रकोप पूरे विश्व में फैला हुआ है. यह महामारी लोगों को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है. कोरोना के बीच जिंबाब्वे में कम उम्र की लड़कियां तेजी से प्रेगनेंट हो रही है. यहां कानूनी रूप से शादी के लिए कोई उम्र नहीं है. यही वजह है कि यहां यौन संबंध बनाना आम बात है. जिंबाब्वे में लंबे समय से कोविड-19 के कारण स्कूल बंद है. जिस कारण यह समस्या और ज्यादा गहरा गई है. 

जिंबाब्वे में शादियों के लिए दो कानून है एक है विवाह एक्‍ट और दूसरा है ट्रेडिशनल मैरिज एक्ट. कोई भी कानून विवाह की सहमति के लिए यह नहीं बताता कि शादी के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए. जबकि ट्रेडिशनल मैरिज एक्ट बहु विवाह की अनुमति देता है. इस कारण जिंबाब्वे में यह समस्या कोरोना काल में और ज्यादा बढ़ गई है. 

एक वेबसाइट की खबर के मुताबिक, डेढ़ करोड़ की आबादी वाले इस देश में मार्च 2020 से लॉकडाउन लगा है. पहले स्कूलों को 6 महीने के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. हालांकि उसके बाद बीच-बीच में स्कूलों को खोला गया. इस दौरान लड़कियों को ऐसे ही छोड़ दिया गया और गर्भनिरोधक दवाएं और क्लीनिक तक उनकी पहुंच खत्म कर दी गई. जिस कारण लड़कियां तेजी से प्रेग्नेंट होने लगी.

जिंबाब्वे सरकार ने अगस्त 2020 में कानून में बदलाव किया था. जिसमें स्कूल में गर्भवती लड़कियों की संख्या बढ़ने के बाद उन्हें स्कूल आने के लिए मना कर दिया गया था. हालांकि बाद में इस नीति को बदल दिया गया. लेकिन फिर भी ऐसी छात्राएं स्कूल वापस नहीं लौटी.

अब जिंबाब्वे में एक नया विवाह विधेयक बहस के लिए संसद के सामने सक्षम है. वह कानूनों को सही तरीके से बनाने, 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के विवाह पर प्रतिबंध लगाने और नाबालिक की शादी में शामिल किसी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देता है. 

बता दें कि जिंबाब्वे में लगभग एक तिहाई लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले ही कर दी जाती है. जबकि 15 साल की उम्र से पहले 4% लड़कियों की शादी की जाती है और उन्हें शिक्षा से वंचित कर दिया जाता है. इस कारण यौन हिंसा की संभावना भी बढ़ जाती है और उन्हें बच्चे के जन्म के समय मृत्यु, गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है. जिंबाब्वे में बाल विवाह के पीछे का एक बड़ा कारण गरीबी भी है. यहां माता-पिता से लड़कियों की शादी कम उम्र में कर देते हैं. क्योंकि उन्हें कम लोगों को ही खाना खिलाना पड़ेगा.

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