जलवायु परिवर्तन के निपटारे में चीन की भूमिका अग्रणी

 
जलवायु परिवर्तन के निपटारे में चीन की भूमिका अग्रणीबीजिंग, 3 मई (आईएएनएस)। जैसा कि हम जानते हैं कि पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन के संकट से परेशान है। यह एक ऐसा वैश्विक संकट है, जिसे कोई भी राष्ट्र अपने दम पर हल नहीं कर सकता। ऐसे में सभी देशों को एकजुट होकर प्रयास करने की जरूरत है। चीन का जिक्र करें तो वह जलवायु परिवर्तन की समस्या के निपटारे के लिए शिद्दत से कोशिश कर रहा है।

विश्व की सबसे बड़ी आबादी और दूसरी बड़ी आर्थिक शक्ति होने के चलते चीन की भूमिका इस बड़े संकट में बहुत अहम है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ मिल-जुलकर योजना तैयार करने पर जोर देते रहे हैं। इतना ही नहीं, चीन इस संकट को खत्म करने के लिए अपने देश के भीतर भी व्यापक उपाय लागू कर रहा है।

चीन द्वारा किए जा रहे प्रयासों से बड़े व जिम्मेदार देश के रूप में चीन की प्रतिबद्धता जाहिर होती है। हाल ही में चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि चीन जलवायु परिवर्तन के मुकाबले के लिए पूरी कोशिश करेगा। वहीं, अप्रैल महीने के आखिरी सप्ताह में फ्रांस व जर्मनी के नेताओं के साथ हुई शिखर बैठक में भी चीन ने अपना वचन दोहराया था। इसके साथ ही शी चिनफिंग ने मनुष्य और प्रकृति के लिए जीवन के एक समुदाय की अवधारणा का प्रस्ताव रखा। इससे यह स्पष्ट होता है कि चीन का लक्ष्य दुनिया भर में सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करना है।

इसके साथ ही चीन ने यह भी वादा किया है कि वह वैश्विक पर्यावरण प्रशासन में भी बढ़-चढ़कर भागीदारी करेगा। यह कोई पहला मौका नहीं है, जब किसी चीनी नेता ने चीन ने इस संकट के निपटारे के लिए प्रमुख भूमिका निभाने की बात कही हो। कहना होगा कि चीनी राष्ट्रपति व अन्य प्रमुख नेता दुनिया को अपने आह्वान के जरिए यह बताना चाहते हैं कि चीन इस चुनौती से निपटने के लिए प्रमुखता से योगदान देगा, जिसका असर हमें भविष्य में वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में कमी के रूप में देखने को मिलेगा।

गौरतलब है कि चीन ने पिछले कई वर्षो में पारिस्थितिकी विकास के साथ-साथ कार्बन डाईऑक्साइड के स्तर में कमी लाने के लिए विभिन्न ठोस उपाय किए हैं। जिनमें हरित विकास के साथ-साथ निम्न-कार्बन व चक्रीय अर्थव्यवस्था पर ध्यान देना अहम है। इतना ही नहीं, चीन सरकार व संबंधित एजेंसियों ने पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रण में करने के लिए भी उचित कदम उठाए हैं। खतरनाक गैसों का उत्सर्जन करने वाले उद्योगों को पुनरुत्पादनीय ऊर्जा का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया है। इसका असर हमने चीन की मुख्य भूमि में पर्यावरण प्रदूषण के स्तर में आई गिरावट के रूप में देखा है।

यह बताना भी जरूरी है कि चीन हरित व कम कार्बन उत्सर्जन पर सक्रिय रुख दिखा रहा है। चीन ने दावा किया है कि वह वर्ष 2030 तक प्रति यूनिट जीडीपी में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन 2005 के मुकाबले 65 फीसदी से अधिक कम कर देगा। वहीं नॉन फॉशिल ऊर्जा का अनुपात 25 प्रतिशत पहुंचाए जाने को लेकर भी चीन प्रतिबद्ध है।

चीन द्वारा किए गए इन प्रयासों व उपायों से जाहिर है कि वह जलवायु परिवर्तन के निपटारे में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए अन्य देशों को प्रेरित करने की क्षमता रखता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अमेरिका जैसे पश्चिमी देश भी इस संकट के मुकाबले के लिए सक्रिय रुख दिखाएंगे, क्योंकि इस समस्या के विकराल रूप लेने में विकसित देशों का योगदान सबसे ज्यादा है, ऐसे में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी।

(लेखक : अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

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