युवाओं को लुभाने के लिए यूनिफॉर्म और हथियारों का सहारा लेते हैं नक्सली 

 
युवाओं को लुभाने के लिए यूनिफॉर्म और हथियारों का सहारा लेते हैं नक्सली

शनिवार को नक्सली हमले में सीआरपीएफ के कई जवान शहीद हो गए और कई जवान घायल हुए. इस हमले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. नक्सली समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही है. छत्तीसगढ़, झारखंड जैसी जगहों के पिछड़े इलाकों से आने वाले युवाओं को लुभाने के लिए यह नक्सली काफी कोशिश करते हैं. यह नक्सली युवाओं को लुभाने के लिए अपनी यूनिफॉर्म और हथियारों का प्रयोग करते हैं. 

2018 में कुछ रिसर्च हुए थे जिसमें यह पता चला कि कैसे नक्सली दो हथकंडों को अपनाकर ट्राइबल एरियाज में रहने वाले युवाओं को उनकी जमीन के लड़ने के लिए उकसाते हैं.

12 साल बाद कर देते सरेंडर 

डॉक्टर पांडे ने अपनी रिसर्च में 25 नक्सलियों का इंटरव्यू लिया जिन्होंने सरेंडर कर दिया था. यह वो नक्सली थे जिन्होंने 12 साल बाद आत्मसमर्पण कर दिया था. इन युवाओं ने कहा कि इन्हें इतने वर्षों में कभी भी नक्सली विचारधारा समझ नहीं आई. वो यह तक नहीं बता सके कि आखिर उन्होंने क्यों इस प्रतिबंधित संगठन का दामन थामा.

सेना के जैसी यूनिफॉर्म 

स्टडी में शामिल एक और रिसर्चर ने बताया कि उनकी स्टडी में शामिल 92% नक्सलियों ने यह कहा था कि वह इस आंदोलन से इस वजह से जुड़े थे, क्योंकि नक्सलियों की यूनिफार्म सेना की तरह हरे रंग की होती है. उनके पास बंदूकें होती हैं. नक्सलियों ने इस वजह से गांव वालों पर अपना अलग प्रभाव छोड़ा था. रिसर्च में यह बात भी सामने आई थी कि करीब 33 फीसदी कैडर्स सरकार की सरेंडर पॉलिसी से प्रभावित हुए थे. 

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