बाप-बेटे की इकलौती जोड़ी जो एक साथ एक ही दिन में मैदान पर खेलते हुए आई थी नजर

बाप-बेटे की इकलौती जोड़ी जो एक साथ एक ही दिन में मैदान पर खेलते हुए आई थी नजर
 
बाप-बेटे की इकलौती जोड़ी जो एक साथ एक ही दिन में मैदान पर खेलते हुए आई थी नजर

आपने अक्सर देखा होगा कि पिता जिस प्रोफेशन में होते हैं अक्सर बच्चे भी उसी प्रोफेशन में अपना करियर बनाते हैं. यह बात क्रिकेट में भी देखने को मिली है. कई क्रिकेटरों के बच्चों ने इसी खेल में अपना करियर बनाने की सोची. इनमें से कुछ सफल भी हुए और कुछ को असफलता हाथ लगी. आज हम आपको बाप-बेटे की उस जोड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जो एक साथ एक ही दिन मैदान पर नजर आई थी. 

बाप-बेटे की इकलौती जोड़ी जो एक साथ एक ही दिन में मैदान पर खेलते हुए आई थी नजर

हम बात कर रहे हैं केन्या के क्रिकेटर हितेश मोदी की, जिनके पिता सुभाष रणछोड़ दास मोदी के केन्याई मूल के अंपायर थे. 1969 में सुभाष मोदी बल्लेबाजी भी करते थे. लेकिन इसके बाद उन्होंने अपना मुख्य कार्य अंपायरिग को चुना. सुभाष मोदी ने केन्या के लिए कई सालों तक क्रिकेट खेला और उन्होंने आईसीसी टूर्नामेंट में अंपायरिंग भी की है. सुभाष मोदी ने 1999 के वर्ल्ड कप में चौथे अंपायर के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 

सुभाष मोदी और हितेश मोदी दोनों बाप-बेटे हैं. यह क्रिकेट दुनिया की इकलौती  पिता और बेटे की जोड़ी है, जो एक ही समय क्रिकेट के एक ही मैदान पर नजर आई थी. इस मैच में सुभाष मोदी ने अंपायरिंग की थी और हितेश मोदी बतौर खिलाड़ी मैदान पर उतरे थे .इस मैच में रोचक बात तो यह थी कि पिता ने बेटे को आउट दिया और बेटा निराशाजनक रूप से मैदान से बाहर जाते हुए नजर आया था. क्रिकेटर पिता ने अपना अंपायरिंग धर्म निभाया. जब बेटा आउट हुआ तो पिता ने सही फैसला लेते हुए अपने बेटे को आउट दिया.

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