एकमात्र भारतीय तेज गेंदबाज जिसने देश के लिए खेले 4 विश्वकप, संन्यास के बाद खुद दादा ने हाथ जोड़कर खेलने को की थी विनती

एकमात्र भारतीय तेज गेंदबाज जिसने देश के लिए खेले 4 विश्वकप, संन्यास के बाद खुद दादा ने हाथ जोड़कर खेलने को की थी विनती
 
एकमात्र भारतीय तेज गेंदबाज जिसने देश के लिए खेले 4 विश्वकप, संन्यास के बाद खुद दादा ने हाथ जोड़कर खेलने को की थी विनती

भारतीय क्रिकेट टीम में एक समय तेज गेंदबाजों की बहुत ही ज्यादा कमी खलती थी. लेकिन आज टीम इंडिया में एक से बढ़कर एक बेहतरीन तेज गेंदबाज है, जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब धमाल मचा रहे हैं. आज हम आपको भारतीय टीम के उस एकमात्र तेज गेंदबाज के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने एक-दो नहीं बल्कि 4 विश्वकप खेलें. इतना ही नहीं संन्यास के बाद सौरव गांगुली ने हाथ जोड़कर इस खिलाड़ी को खेलने के लिए मनाया था. 

एकमात्र भारतीय तेज गेंदबाज जिसने देश के लिए खेले 4 विश्वकप, संन्यास के बाद खुद दादा ने हाथ जोड़कर खेलने को की थी विनती

हम बात कर रहे हैं जवागल श्रीनाथ की, जो एक समय तेज गेंदबाजी में टीम इंडिया की रीड की हड्डी हुआ करते थे. जानकारी के लिए बता दें कि जब जवागल श्रीनाथ ने संयास ले लिया था, तब खुद सौरव गांगुली विनती कर उनको वापस टीम इंडिया में लाए थे. 2002 में जवागल श्रीनाथ ने क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था. लेकिन 2003 में टीम इंडिया को विश्व कप खेलना था. तभी गांगुली टीम के कप्तान थे. 

गांगुली जानते थे कि जवागल के बिना जीत पाना बहुत ही मुश्किल है. उस समय टीम इंडिया के पास कोई भी अनुभवी तेज गेंदबाज नहीं था. ऐसे में युवा तेज गेंदबाज जहीर खान को किसी सीनियर तेज गेंदबाज की जरूरत थी. उस समय सौरव गांगुली ने जवागल श्रीनाथ से बात की और उन्हें टीम इंडिया में दोबारा खेलने के लिए मनाया. 2003 के विश्वकप में जवागल श्रीनाथ ने बहुत ही कमाल की गेंदबाजी की और 11 मैचों में 16 विकेट झटके और अपनी काबिलियत को साबित कर दिया.

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