आखिर मैच जीतने के बाद खिलाड़ी स्टंप को अपने साथ क्यों ले जाते हैं घर? क्या है इससे जुड़ा इतिहास

आखिर मैच जीतने के बाद खिलाड़ी स्टंप को अपने साथ क्यों ले जाते हैं घर? क्या है इससे जुड़ा इतिहास
 
आखिर मैच जीतने के बाद खिलाड़ी स्टंप को अपने साथ क्यों ले जाते हैं घर? क्या है इससे जुड़ा इतिहास

क्रिकेट के खेल में स्टंप सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं. आपने अक्सर स्टंप्स को मैच के दौरान अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी या सीरीज जीतने वाली टीम के खिलाड़ियों को उखाड़कर घर ले जाते हुए देखा होगा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्रिकेटर ऐसा क्यों करते हैं. आज हम आपको इसी बारे में विस्तार से बता रहे हैं.

आखिर मैच जीतने के बाद खिलाड़ी स्टंप को अपने साथ क्यों ले जाते हैं घर? क्या है इससे जुड़ा इतिहास

 बता दें कि पहले क्रिकेट में दो स्टंप हुआ करते थे, जिन्हें दोनों तरफ लगाकर खेला जाता था. 1975 के बाद एक मैच के दौरान बॉलर की गेंद तीन बार दोनों स्टंप के बीच से निकल गई और और बेल्स नहीं गिरी. इस परेशानी से बचने के लिए तीसरा स्टंप इस्तेमाल किया जाने लगा. दोनों के बीच दो छोटी गिल्ली रखी गई.

अक्सर खिलाड़ी किसी मैच में अच्छा प्रदर्शन करने पर या सीरीज जीतने पर यादों के रूप में स्टंप उखाड़ कर अपने साथ ले जाते हैं. भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी स्टंप को अपने घर ले जाने के शौकीन है. एक बार जब धोनी से पूछा गया था कि वह स्टंप का क्या करेंगे. इसके जवाब में धोनी ने कहा था- यह मेरे रिटायरमेंट प्लान का हिस्सा है, जो स्टंट में लेकर जाता है उन पर मैंने कई लेबलिंग नहीं की कि कौन-सा स्टंप किस मैच का है. जब मैं रिटायर हो जाऊंगा तो बैठ के पुराने वीडियो देखूंगा और लोबो से इनकी पहचान करूंगा. रिटायर होने के बाद यह मेरा टाइम पास होगा.

जानकारी के लिए बता दें कि आजकल एलईडी स्टंप इस्तेमाल किए जाते हैं, जिन्हें क्रिकेटरों को घर ले जाने की इजाजत नहीं है. इन स्टंप की कीमत भी 25-30 लाख रुपए होती है. इसलिए इन स्टंप को खिलाड़ी को देना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है.

From around the web