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वो 3 मौके जब नाराजगी के चलते क्रिकेट टीमों ने बीच मैच में छोड़ा मैदान

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क्रिकेट में स्लेजिंग तो होती है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि क्रिकेटर अपना आपा ही खो देते हैं. क्रिकेट इतिहास में कई ऐसी घटनाएं हुई, जब खिलाड़ियों ने मैदान पर आपा खो दिया. लेकिन कुछ ऐसे मैच हुए, जहां केवल खिलाड़ियों ने ही नहीं बल्कि पूरी टीम ने नाराजगी के चलते खुद को मैदान से बाहर कर दिया.

भारत

मेलबॉर्न टेस्ट के दौरान लिटिल मास्टर कहे जाने वाले सुनील गावस्कर को अंपायर ने डेनिस लिली की गेंद पर आउट करार दे दिया था. गावस्कर इस बात से बेहद गुस्सा हो गए और उन्होंने नॉन स्ट्राइक एंड पर खड़े चेतन चौहान को वापस पवेलियन लौटने के लिए कहा. चेतन चौहान सुनील गावस्कर के कहने पर पवेलियन वापस लौटने लगे. यह देखकर हर कोई हैरान रह गया, लेकिन भारतीय टीम के ग्रुप मैनेजर ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया.

श्रीलंका

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1999 में श्रीलंका और इंग्लैंड के बीच ट्राई सीरीज के एक मैच के दौरान अंपायर ने मुरलीधरन के एक गेंद को नो बॉल कार दिया जिससे कप्तान अर्जुन रणतुंगा नाराज हो गए. उन्होंने अंपायर से बहस की. अर्जुन रणतुंगा अपनी टीम को लेकर बाउंड्री लाइन पर चले गए और उन्होंने खिलाड़ियों से ना खेलने को कहा. लेकिन बोर्ड के कहने पर वह वापस टीम के साथ मैदान पर पहुंचे.

वेस्टइंडीज

1979 में वेस्टइंडीज की टीम न्यूजीलैंड दौरे पर गई थी. इस दौरे पर एक टेस्ट मैच में अंपायर गौडाल ने कई गलत फैसले दिए. चाय के दौरान वेस्टइंडीज की टीम ने अंपायर गौडाल को बदलने को कहा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके बाद वेस्टइंडीज की पूरी टीम ने जानकर कैच छोड़े और गेंद को बाउंड्री के पार कराया. किसी तरह यह मैच खत्म हुआ. इस वजह से दोनों देशों के बोर्ड के बीच संबंध भी खराब हो गए थे.

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