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संन्यास के बाद धोनी करेंगे ये व्यापार, कर चुके हैं पूरी तैयारी

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पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अगस्त के महीने में क्रिकेट के तीनों प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी थी. धोनी के संन्यास के बाद सभी के मन में यही सवाल था कि अब धोनी क्या करेंगे. लेकिन अब इस सवाल का जवाब मिल गया है कि धोनी अपने संन्यास के बाद क्या करने वाले हैं. संन्यास लेने के बाद धोनी ने एक खास व्यापार में रुचि दिखाई है. सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक धोनी ने रांची में झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गाों का व्यापार करने का मन बनाया है. इसके लिए धोनी ने बुकिंग भी करा दी है.

धोनी ने मध्यप्रदेश में झाबुआ के कड़कनाथ के दो हजार चूजों के लिए अग्रिम भुगतान के आर्डर दे दिए हैं. धोनी ने क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद जैविक खेती में हाथ आजमाया है. वही अब धोनी मुर्गों की फार्मिंग में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. धोनी ने मुर्गों की बुकिंग के लिए अपने पुराने दोस्त और वेटरनरी डॉक्टर कुल्डु की सहायता ली. मुर्गों की बुकिंग के लिए झाबुआ के रहने वाले आदिवासी किसान विनोद मैडा को अग्रिम भुगतान कर दिया गया है, उन्हें 15 दिसंबर तक दो हजार चूजों की डिलीवरी करनी है.

मुर्गों की बुकिंग करने वाले आदिवासी किसान विनोद मैडा ने बताया कि धोनी से इस आर्डर के मिलने से वह काफी खुश हैं. वह इन चूजों की डिलीवरी करने के लिए खुद रांची जाएंगे, ताकि वे धोनी से मिल सके. बता दें कि आदिवासियों की क्षेत्रीय भाषा में कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गे-मुर्गियों को काली मासी कहा जाता है. इनके मांस, चोंच, कलंगी, जुबान, टांगे, नाखून चमड़ी सभी काले होते है.

इनमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है और वसा बहुत कम होती है. मुर्गों की यह प्रजाति धार और झाबुआ, मध्य प्रदेश, बस्तर, छत्तीसगढ़, गुजरात और राजस्थान के आसपास के जिलों में मिलती है. कड़कनाथ मुर्गे की प्रजाति के तीन रूप होते हैं. इनका पहला रूप जेड ब्लैक है, जिनके पंख पूरी तरह से काले होते हैं. जबकि इनकी दूसरी प्रजाति पेंसिल्ड हैं. इस प्रजाति के मुर्गे का आकार पेंसिल की तरह होता है. वही इन मुर्गों की तीसरी प्रजाति गोल्डन कड़कनाथ है. इन मुर्गों के पंख पर गोल्डन रंग के छींटे नजर आते हैं.

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