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दुनिया का यह सबसे अमीर आदमी 1 दिन में अंबानी की दौलत का 100% किया करता था दान..

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जब बात आए सबसे अमीर आदमियों की तब हर कोई विल गेट्स, जैफ बेजॉस और मुकेश अंबानी का नाम गिनता है। यह तो आज के समय के अमीर व्यक्ति है। इससे पहले भी गुजरे जमाने में राजा महाराजाओं के पास अपार दौलत थी। यदि उन में सबसे ज्यादा अमीर कौन था इस बारे में चर्चा की जाए तो यह शायद किसी को नहीं पता होगा।
ऐसे में जिसके बारे में आज हम बात करने जा रहे हैं। उसे इतिहास का सबसे अमीर शख्स माना जाता है, जिसकी दौलत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति से ज्यादा पैसा एक ही दिन में दान में दे दिया करता था। इसी तरह दान करते हुए नतीजा यह निकला कि वह एक दिन खुद कंगाल हो गया और उसका देश भी गरीब हो गया आइए जानते हैं कौन है यह शख्स।
जिस व्यक्ति के अमिया बात कर रहे हैं वह अफ्रिका से है। आज के समय में अफ्रीकी देशों की हालत आर्थिक मामले में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन इतिहास का सबसे अमीर राजा और व्यक्ति अफ्रीका से ही था। माली देश के मनसा मूसा दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का दर्जा हासिल किए हुए थे। मूसा अमीर होने के साथ-साथ काफी उदार हृदय वाले भी थे। उनका जन्म सन 1280 में हुआ था। मूसा के एक बड़े भाई को राजा बना था। मगर वह एक अभियान से वापस नहीं लौट सके जिसके बाद नतीजा यह हुआ कि मूसा को राजा बना दिया गया।
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मूसा माली के राजा हुआ करते थे जो सोने और दूसरी कीमती चीजों के लिए काफी प्रचलित जगह मानी जाती थी माली को बहुत फायदा होता था।
खबरों की मानें तो उस समय दुनिया में जितना भी सुना था। उसका आधा हिस्सा अकेले माली के पास ही था मूसा जरूरतमंद लोगों को बहुत सोना दिया करते थे। कहा जाता है कि मोसाद जब हज पर गए थे तो उन्होंने अपनी इस यात्रा के दौरान दोनों हाथों से सोना दान किया था।
इस यात्रा में 60,000 लोग उनके साथ मौजूद थे यह सफर उन्हें काफी महंगा पड़ा उस समय हुआ। यह कि इतना सोना बांटने से उनके देश की आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ गई। असल में मूसा बहुत ही अधिक मात्रा में सोना बांट रहे थे, जिसका असर यह हुआ कि सोने के दाम गिर गए।
मूसा के सोना बांटने से मध्यपूर्व को बहुत नुकसान उठाना पड़ा था मूसा को इस बात का पता लगा तो उन्होंने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई प्रयास किए अफ्रीका में एजुकेशन शुरू करने का ताज भी मूसा के ही सड़ जाता है। बताया जाता है कि कला साहित्य और वास्तुकला में उनकी काफी दिलचस्पी थी जिसके लिए उन्होंने अपने राज्य में शिक्षा को काफी प्रोत्साहन दिया।
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