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इन मन्त्रों का जाप जीवन में लाता है सुख-शांति, व्यक्ति अमीर और सुखी हो जाता है

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महाभारत सिर्फ युद्ध ही नहीं बल्कि सनातन धर्म का पवित्र ग्रंथ है जो व्यक्ति या व्यवहारिक संसारी ज्ञान देने के साथ ही जीवन से जुड़ी कई सारी सच्चाई यों के बारे में भी आपको बतलाने का काम करता है जो हर व्यक्ति अगर समय पर रहते हुए समझ लेता है तो वह व्यक्ति हमेशा सुखी जाता है। तो आज हम आपको महाभारत के शांति पर्व के बारे में बताते हैं। इस पर कुछ श्लोक के माध्यम से से बताया गया है कि व्यक्ति को आखिर कौन से मंत्रों को सीखना चाहिए।

सर्वे क्षयान्ता निचया: पतनान्ता: समुच्छ्रया:। संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं च जीवितम्॥”

इस श्लोक का मतलब है कि समस्याओं का अंत अविनाश है। सभी प्रकार के उत्थान का अस्पताल है। सभी सेवकों का अंत वियोग है और जीवन का अंत मरण है।

सर्वे क्षयान्ता निचया:
महाभारत के पर्व में बताया गया है कि हम सब ने जीवन में जितने भी चीजों का संग्रह किया है। अंत को सबका विनाश हो जाएगा इसलिए हमें कभी भी कुछ चीजों के बारे में बहुत ज्यादा नहीं सोचना चाहिए। बहुत से धन का संग्रह करने में अपना सारा जीवन लगा देते हैं। लेकिन मृत्यु के बाद वह किसी का नहीं होता इसलिए हमें उतना ही रहना चाहिए जितना हमारे लिए जरूरी हो।

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पतनान्ता: समुच्छ्रया:
इसका अर्थ है कि जो चीज उन्नति कर दी है। उसका पतन भी निश्चित है। यह तात्पर्य है कि जो लोग उन्नति कर के उच्च पदों को प्राप्त करते हैं। उन्हें कभी कभी घमंड नहीं करना चाहिए। अपने से छोटों को हीन नहीं समझना चाहिए। संसार में कोई भी चीज स्थाई नहीं होती है।

संयोगा विप्रयोगान्ता
इन शब्‍दों का अर्थ है कि जिन चीजों का संयोग हुआ है, उन चीजों का वियोग होना भी निश्चित है। यानी हमें कभी भी ऐसी किसी चीज को लेकर पछतावा नहीं करना चाहिए जो हमें मिली थी। अगर कोई चीज जो हमें मिली थी वह अगर हमसे दूर चली जाए या फिर नष्‍ट हो जाए तो हमें उसके बारे में दुखी नहीं होना चाहिए।

मरणान्तं च जीवितम
अर्थात जो पैदा हुआ है वह 1 दिन मरेगा जरूर कहने का अर्थ है कि हमारे सभी संबंधों में हमें प्रेमभाव जरूर रखना चाहिए। लेकिन किसी की मृत्यु हो गई हो जाए तो उसका पश्चाताप नहीं करना चाहिए।

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