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Covid-19 effects: वैज्ञानिकों का दावा, मरीजों को बहरापन दे रहा है कोरोना

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देश में कोरोनावायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। चीन से निकले इस खतरनाक वायरस ने न जाने कितने लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। और कई सारे लोग ऐसे हैं जो सभी भी संक्रमित हैं। आपको बता दें कि भारत में भी है वायरस तेजी के साथ चल रहा है और मरने वालों की संख्या में काफी ज्यादा इजाफा देखने को मिला है।

अब इस बीच वैज्ञानिकों को कोरोनावायरस संक्रमण के कुछ मरीजों में स्थाई रूप से अचानक बहरेपन की समस्या पैदा होने की बात भी सामने आई है। आपको बता दें कि ब्रिटेन में संबंध में किए गए एक अध्ययन में यह बात बताई गई है कि कोरोनावायरस संक्रमण के कारण होने वाले लोगों की संख्या बेहद कम है।

ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के विशेषज्ञों समेत वैज्ञानिकों के मुताबिक संक्रमण के कारण बहरेपन की समस्या पैदा होने को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है। क्योंकि स्टेरॉयड के जरिए उचित उपचार में इस समस्या को दूर किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने कहा है कि इसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है लेकिन फ्लू जैसे वायरल संक्रमण के बार इस प्रकार की समस्या हो सकती है।

कोरोनावायरस से गंभीर रूप से संक्रमित होने के बाद अचानक सुनने की क्षमता नष्ट हो गई है। जिस व्यक्ति को संक्रमण से पहले श्रवण संबंधी कोई अन्य समस्या नहीं थी। व्यक्ति को स्टेरॉयड की गोलियां और टीके लगाए गए, जिसके बाद उसकी श्रवण क्षमता आंशिक रूप से लौट गई। आपको बता रहे हैं कि अनुसंधानकर्ताओं ने एक अध्ययन में कहा है कि बड़ी संख्या में लोगों के संक्रमित होने के कारण बहरेपन की समस्या को लेकर अनुसंधान करने की आवश्यकता है ताकि समस्या का पता लगाकर इसका उपचार अच्छे से किया जा सके।

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जानकारी के लिए आपको बता दें कि जो लोग कोरोनावायरस से वे पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) के कारण ‘ब्रेन फॉग’ (Brain fog) और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। ब्रेन वो खुद एक बीमारी नहीं है बल्कि कई मानसिक बीमारियों के कारण यह बनती है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने कोरोनावायरस रोगियों के फेफड़े प्रभावित होने का इशारा किया है। एक स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़े सिटी स्कैन में काले दिखाई देते हैं जबकि कोविड-19 रोगियों में ग्रे पीस दिखाई देते हैं

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