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क्या सच में अंतरिक्ष से पृथ्वी पर आया है सोना, वैज्ञानिकों ने किये हैरान करने वाले दावें

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भारत के साथ-साथ कई सारे ऐसे देश हैं जहां पर सोने को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। इस पीली धातु की उत्पत्ति को लेकर तमाम तरह की कहानियां भी प्रचलित है। वैज्ञानिक समुदाय में भी इसकी एक राय नहीं है। लेकिन वैज्ञानिकों के एक बड़े तबके का मानना है कि धरती के भीतर मौजूद सोना धरती की संपत्ति नहीं है बल्कि यह अंतरिक्ष से उल्कापिंड के जरिया आया है।

इस कीमती पीली धातु की उत्पत्ति के बारे में वैज्ञानिक जो तर्क पेश कर रहे हैं उस पर शायद ही किसी को भरोसा हो। लेकिन वैज्ञानिकों के पास इसके ठोस सबूत भी मौजूद है मूल रूप से मुलायम धातु सोना के बारे में वैज्ञानिक जॉन का दावा है कि अधातु अंतरिक्ष से उल्का पिंडों के द्वारा धरती पर आई है यही कारण है कि धरती के बाहरी हिस्सों में यह पाया जाता है।

वैसे तो सोने की उपलब्धता के बारे में पिछले कई सारे दर्शकों से नए नए सिद्धांत आए हैं और वैज्ञानिक समुदाय को मुहर लगानी है। इस सिद्धांत की वकालत करने वालों का कहना है कि धरती के बाहरी तह, जो करीब 25 माइल मोटा है। में घूलने वाले हर 1000 टन धातुओं में केवल 1.3 ग्राम सोना था। करीब साढ़े चार अरब साल पहले धरती की उत्पति के बाद इसकी सतह ज्वालमुखी और पिघले हुए चट्टानों से भरी पड़ी थी। इसके बाद लाखों सालों से धरती के बाहरी परत में घूमते हुए लोहा धरती के केंद्र बना हुआ हैं।

इम्पीरियल कॉलेज, लंदन के भूगर्भशास्त्री मथिया विलबोल्ड का कहना है कि इस तर्क पर आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता इसलिए विज्ञान को इसकी विवेचना करनी पड़ेगी। हम बिलबोर्ड का कहना है कि सिद्धांत यह है कि धरती के मुख्य हिस्से के गठन के बाद उल्का पिंडों की बौछार हुई जो धरती से टकराए। इन उल्का पिंडों में कुछ मात्रा में सोना था इससे धरती के बाहरी सतह पर सोने से भर दिया आपको बता दें कि बिल बोर्ड ने कहा है कि यह सिद्धांत उल्का पिंडों की गतिविधियों से मेल खाता है। जैसे कि वैज्ञानिक समझते हैं यह घटना करीब 3 साल पहले की होगी।

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जानकारी के लिए आपको बता दें कि साल 1970 के दशक में अपोलो के चंद्रमा पर उतरने के बाद उल्का पिंडों के जरिए धरती पर सोना आने का सिद्धांत दिया गया है। वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर चट्टानों के लिए गए नमूनों में उसकी सतह से लिए गए नमूनों की तुलना में कम रेडियम और सोना पाया। इसे यह माना गया कि धरती और चांद पर अंतरिक्ष से रेडियम युक्त उल्कापिंड गिरे थे उल्का पिंडों की बारिश के बाद यह चांद पर तो वैसे ही पड़े रहे लेकिन धरती की आंतरिक गतिविधियों के कारण यह उस में समा गए।

हालांकि वह अन्य वैज्ञानिकों का मानना है कि इस समय फिर से विचार करने की जरूरत है। फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के मुनीर हुमायून का कहना है कि यह काफी हसीन लगता है। लेकिन आंकड़ों में काफी लंबा अंतर है उनका कहना है कि सन 1970 के दशक में चांद और धरती के चट्टानों के माध्यम से शानदार नतीजे निकले और 1990 के दशक में इस बारे में अध्ययन भी किया गया।

हालांकि सोने की उत्पत्ति के बारे में कुछ वैज्ञानिकों की राय भले ही अलग हो। लेकिन बिलबोर्ड के मुताबिक अधिकतर वैज्ञानिक ग्रीनलैंड की पहाड़ियों पर किए गए शोध को आज भी सबसे ज्यादा विश्वसनीय मानते हैं। उन्होंने कहा है कि हुमायुन की तरह कई वैज्ञानिकों ने इस पर तर्क को पूरी तरह से खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि आप कभी भी पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हो सकते लेकिन हमारे मॉडल की खूबसूरती यह है कि इसमें सभी आंकड़े बेहतरीन तरीके से मिलते है।

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