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GK IN HINDI; JAIPUR के जलमहल का एक ऐसा रहस्य जो 300 साल पानी में डूबे रहने के बाद भी नहीं हुआ ख़राब

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भारत की स्थापत्य कला और राजाओं की भव्य निर्माण 21वीं सदी की इंजीनियरिंग के लिए चुनौती बने हुए हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में 5 मंजिला जल महल है। इसकी 4 मंजिलें पिछले 300 सालों से पानी में डूबी हुई है। हालांकि अब सवाल यह है कि 300 साल पहले जब लोग पक्के मकानों में नहीं रहते थे तो इस महल के निर्माण में ऐसा क्या उपयोग किया गया। जो 300 साल तक पानी में रहने के बावजूद भी खराब नहीं हुआ।

राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर यूनिवर्सिटी बीटेक ग्रेजुएट नीता सिंह इस बात को बताती हैं कि राजस्थान के ऐतिहासिक जल महल को 300 साल पहले आमेर के महाराज ने बनवाया था। जल महल के निर्माण के पीछे एक विशेष बात यह थी कि जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। यह 15वीं शताब्दी में जिन जगहों में अकाल पड़ने पर आमेर के शासक ने बांध बनाने का निश्चय किया था ताकि आमेर और अमरगढ़ के पहाड़ों से निकलने वाली पानी को इकट्ठा किया जा सके और पानी के निकास के लिए पानी के भीतर तीन आंतरिक दरवाजे बनाए गए और मानसागर झील बनाकर तैयार की गई।

हालांकि झील के सुंदरता और समय के राजाओं के आकर्षण का केंद्र थी और राजा अक्सर नाव में बैठकर इसकी सैर किया करते थे। राजा सवाई जयसिंह ने झील के बीचो-बीच महल बनाने का निश्चय किया ताकि वह अश्वमेध यज्ञ के बाद अपनी रानी और पंडितों के साथ मिल के मध्य में शाही स्नान कर सके। झील के बीच अपनी दास्तां सुनाता जल महल पांच मंजिला इमारत है, जिसकी 4 मंजिल पानी के भीतर बनी हैं और एक पानी के ऊपर नजर आती है।

इस पांच मंजिला इमारत की चार मंजिला हमेशा पानी के नीचे डूबी रहती है। और से एक मंजिल ही दिखाई देती है इस महल के किसी भी कोने से पानी का रिसाव नहीं होता। क्योंकि इसे बनाने में मजबूत चुनाव पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है और मोटी मोटी दीवार इसको बनाया गया है

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