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एक व्यक्ति दूसरों की बुराई करने की आदत के कारण हमेशा अशांत रहता था, एक दिन वह भगवान को कोस रहा था, तभी भगवान उसके सामने प्रकट हो गए

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कई सारे लोग ऐसे होते हैं जो खाली समय में दूसरों की बुराई करने का काम शुरू कर देते हैं। हालांकि यह लोग अपने कामों को महत्व नहीं देते। बल्कि दूसरों के दुखों से जलने का काम करते हैं। और जो लोग इस प्रवृत्ति के होते हैं वह जीवन में कितना भी धन कमा लें। लेकिन कभी भी उनका मन शांत नहीं रहता। लेकिन अगर आप जीवन में वास्तविक शांति चाहते हैं तो आपको यह काम छोड़ देना चाहिए। क्योंकि जैसे ही आप इस काम को छोड़ देंगे आपको तुरंत मानसिक शांति का आभास होगा। चलिए आज हम आपको इसका एक उदाहरण देते हुए एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताते हैं जो हमेशा अपने पड़ोसियों के सुख को देखकर दुखी होता था। और हमेशा मौका मिलते ही उनकी बुराई करता था।

दूसरों की बुराई करने की आदत की वजह से कुछ लोगों का मन हमेशा ही अशांत रहता है। ऐसे ही एक दिन एक व्यक्ति भगवान को लगातार कोसे जा रहा था कि उसे आखिरकार वैसी सुख सुविधाएं क्यों नहीं दी। जैसी उसके पड़ोसियों के पास है। बस तभी एक दिन भगवान उसके सामने आकर प्रकट हो गए और भगवान ने उस व्यक्ति से पूछा कि बताओ तुम्हारी इच्छा क्या है।

भगवान के सामने प्रकट होने पर उस व्यक्ति ने जवाब दिया कि – मैं बस सफल होना चाहता हूं। मुझे भी वह सारी सुख सुविधाएं चाहिए जो मेरे पड़ोसियों के पास है। सभी लोग बस मेरी बढ़ाई करें। भगवान ने उस व्यक्ति की बात सुनकर उसको दो थेले दे दिए और कहा कि एक थैले में तुम्हारी पड़ोसी की सारी बुराइयां है और दूसरे थैले में तुम्हारी सभी बुराइयां है।

ये लो पड़ोसी की बुराइयां वाले थैले को अपनी पीठ पर टांग लो। अपनी बुराइयों वाला थैला तुमको आगे की तरफ टांगना हैं। हालांकि अपनी बुराइयों वाले थैले को बार-बार खोल करके देखते रहना क्योंकि अगर तुम बार-बार ऐसा करोगे। तो तुम भी एक समय आने के बाद सुखी हो जाओगे और तुम्हें भी वही सम्मान मिलेगा /भगवान के बाद सुनने के बाद उस व्यक्ति ने दोनों थैली उठाए। लेकिन उस समय उसने एक गलती कर दी उसने अपनी बुराइयों का थैला पीठ पर लाद दिया और पड़ोसी की बुराइयों का थैला आगे हाथ में ले लिया। व्यक्ति बुराइयों के दोनों थैले लेकर बाहर निकला और पड़ोसी की बुराइयां खुद भी देखता और दूसरों को भी दिखाने का काम करता। क्योकि खुद की बुराइयां तो उसने पीछे टांग रखी थी।

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हालांकि भगवान के वरदान का उल्टा असर होने लगा। क्योंकि भगवान ने जैसा उसे बताया था उसका उल्टा ही उस व्यक्ति ने कर दिया था। उसे और ज्यादा दुख और अशांति मिलने लगी। वह व्यक्ति और ज्यादा परेशान होने लगा।

प्रसंग की सीख

इस कहानी से हमें एक सीख जरूर लेनी चाहिए। व्यक्ति का जीवन बहुत छोटा होता है और इस छोटे से जीवन में हमें सुखी रहने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि हम जितना दूसरों को देखकर के जलेंगे उतना ही ज्यादा दुख पाएंगे और अपने मन को भी अशांत करेंगे। इसलिए हमें दूसरों की नहीं बल्कि खुद की बुराइयां देखनी चाहिए और उन में लगातार सुधार करना चाहिए। सभी व्यक्ति एक सुखी जीवन की कल्पना कर सकता है।

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