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भारत के इन मंदिरों में नहीं चढ़ता देवी-देवताओं को प्रसाद, यहां लोग चढ़ाते हैं अपना खून

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धर्म, भक्ति, अध्यात्म और साधना का देश है भारत, जहां प्राचीन काल से पूजा-स्थल के रूप में मंदिर विशेष महत्व रखते रहे हैं। आमतौर पर जब आप मंदिर का नाम सुनते हैं तो ये समझ जाते हैं कि यहां कोई भगवान विराजमान होंगे और उनकी ही पूजा होती होगी। आखिर ऐसा ही तो होता है मंदिरों में।

लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां किसी भी भगवान या देवी-देवता की पूजा नहीं होती। जी हां, दरअसल यहां कौरव और पांडवों की पूजा होती है। बता दें कि इनमें से तो एक मंदिर ऐसा भी है, जहां लोग प्रसाद के रूप में अपना खून चढ़ाते हैं।

द्रौपदी मंदिर भारत के दक्षिण में कर्नाटक के बंगलुरु में स्थित है। बता दें कि यह मंदिर करीब 800 साल पुराना है। इस मंदिर को धर्मराय स्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

देवों की नगरी उत्तराखंड के उत्तरकाशी के सारनौल में स्थित एक मंदिर है, जिसे दानवीर कर्ण का मंदिर कहा जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि यह मंदिर लकड़ियों से बना हुआ है जिसमें पांडवों के 6 छोटे-छोटे मंदिर भी बने हुए हैं।

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वादियों से ढके मनाली में एक खास तरह का मंदिर है जिसे हिडिंबा मंदिर कहा जाता है। आपको बता दें कि हिंडिबा भीम की पत्नी थीं, जिनका पुत्र घटोत्कच था। वैसे ऐसा कहा जाता है कि हिडिंबा मंदिर में लोग आज भी प्रसाद के रूप में अपना खून चढ़ाते हैं।

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