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जाने क्या हुआ था जब भारत में एक मुस्लिम रियासत का प्रधानमंत्री बन गया एक यहूदी..

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महाराष्ट्र एक ऐसी जगह है जो कि अपने पर्यटकों में काफी चर्चाओं का हिस्सा बनी रहती है। ऐसे में महाराष्ट्र से जुड़ी कई ऐसी कथाएं भी है जो बहुत ही कम लोग जानते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही महाराष्ट्र के पैसे के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप चौक जायेंगे महाराष्ट्र के अलीबाग शहर में यदि आप पर्यटकों से भरी जगह से आगे बढ़कर लोगों से पूछेंगे किसी ने गांव कहां है तो शायद आपको इस सवाल का जवाब ना मिले।
मगन अबोध जैसे एक मशहूर सिनेगॉग के बारे में इन लोगों को क्या नहीं पता यह सवाल आपके मन में आ सकता है। हमारे मन में भी ऐसा ही कुछ सवाल आया लेकिन तभी एक स्थानीय महिला ने मुझसे पूछा आप सिनेगाॅग नहीं मसीद (मस्जिद) कहिए। जब मैंने मस्जिद पूछा तब जाकर लोगों के समझ में आया कि अच्छा आपको मस्जिद जाना है।
यह बोलकर कोई भी आपको सिनेगोर तक नहीं ले जाएगा। इतना सुनने के बाद आपके मन में भी यह सवाल जरूर आएगा कि कोई सीने गांव को मस्जिद कैसे कह सकता है। आपको बता दें कि सिनेगोर यहूदियों के प्रार्थना स्थल को कहते हैं।
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अब इस बात को जानकर भी आप असमंजस में जरूर पड़ जाएंगे कि जहां पूरी दुनिया में मुसलमानों और यहूदियों में विवाद है। वहां कोई सैनिकों को मस्जिद कैसे कह सकता है लेकिन इसके लिए आपको कई और ऐसे ही आश्चर्यजनक और धीरे-धीरे देने इसराइल के बारे में पता चलेगा। आज संयुक्त अरब अमीरात बहरीन और इजरायल के बीच हुई शांति वार्ता से सब हैरान हैं।
यहां तक की  वॉशिंगटन और दुबई में बैठे नेताओं को भी शायद इस बात पर भरोसा नहीं हो रहा होगा। मुसलमान और यहूदी जैसे दो धर्मों में बैठे देशों में शांति समझौता कैसे हो सकता है। जैसा एक मुसलमान देश इसराइल को बिना शर्त कैसे मान्यता दे सकता है। इसके पीछे भी अनसुलझी कहानी है जिसे बहुत ही कम लोग जानते हैं।
आपको बता दें कि भारतीय मुसलमानों और यहूदियों ने कई सदियों पहले एक साथ मिलकर रहने की मिसाल कायम की थी साल 1948 में इसराइल बनने के बाद शायद ही कोई साल शांतिपूर्वक बीता होगा, लेकिन महाराष्ट्र में सिर्फ मुसलमान और यहूदी ही नहीं बल्कि हिंदू पार्टी और इसाई सभी धर्म के लोग काफी शांतिपूर्वक रहते हैं। ऐसा ही नहीं महाराष्ट्र के इतिहास में एक मुसलमान रियासत का शासन एक यहूदी व्यक्ति संभाल चुके हैं।
जी हां! रोमन सल्तन ने जब यरुशलम का यहूदी मंदिर सैनिकों सिने गॉड थोड़ा तब यहूदियों ने ज्ययुडेआ प्रांत और नॉर्दन गरीबी को छोड़ दिया सन् 135 यानी अब से 1885 वर्ष पहले जब रोमन लोगों ने इनके इलाके पर कब्जा कर लिया था तो वह अपना धर्म और संस्कृति बचाने के लिए यहूदी रोमन साम्राज्य से पलायन करने पर मजबूर हो गए थे।
यहूदियों की टोलियां दुनिया भर के अनेक देशों में जाकर बस गई इन दोनों को लॉस्ट ट्राइब कहा जाता है और भारत में आए बेने इसराइली, कोचीन में आए यहूदी और मणिपुर में बसे बेनी मनासे इसी बिरादरी के माने जाते थे। इस तरह बेले इसराइली में लोगों और भारत का नाता 1800 साल से भी ज्यादा पुराना है।
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