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आखिर क्यों मच्छर के भिनभिनाते ही आपके हाथ अपने आप हो जाते है एक्टिव

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यह बात हम सभी जानते हैं कि मनुष्य के शरीर जो भी क्रियाएं करता है। उसके लिए आदेश उसके मस्तिष्क का होता है। किसी को देखकर मुस्कुराने की प्रक्रिया के बीच एक लंबी प्रक्रिया छुपी होती है। आंखें उसकी तस्वीर को मेमोरी में भेजती हैं। और तस्वीर का मिलान किया जाता है वेरिफिकेशन होने के बाद मस्तिष्क को बताया जाता है। दिमाग चेहरे को आदेशित करता है। तब जाकर हम किसी परिचित व्यक्ति को देखकर तुरंत मुस्कुरा जाते हैं। लेकिन कुछ क्रिया ऐसी होती हैं जिनमें एक लंबी प्रक्रिया पूरी नहीं होती। जैसे कांटा चुभ जाने पर अचानक पीछे हट जाना अचानक आये पत्थर से बचने के लिए हाउस के सामने आ जाना या फिर मच्छर मारने या भगाने के लिए अपने हाथ को तुरंत से एक्टिव करना।

हमारे बाहरी वातावरण में होने वाले अचानक परिवर्तन या किसी उद्दीपन के कारण बिना सोचे समझे होने वाली प्रक्रिया हो प्रतिवर्ती क्रिया या रिप्लेस फंक्शन कहा जाता है। जो कि कोई भी कार्य मस्तिष्क अनुमति के बिना नहीं होता। परंतु यह एकमात्र प्रक्रिया है। जिसकी सूचना मस्तिष्क तक पहुँचती ही नहीं है।

यह सभी प्रतिवर्ती क्रिया है किसी ना किसी तरह से हमारी रक्षा करते हैं। कभी भी हमें दूर हुए तथा विषैली गैसों से बचाने के लिए मदद करते हैं परंतु कई बारी है किसी ना किसी के लिए परेशानी का कारण भी बन जाती है।

खांसना (coughing)
छींकना (sneezing)
हिचकी लेना (Hiccup)
आहें भरना (sighing)
सिसकना(sobbing)

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इसके अतिरिक्त गरम तवे पर एक बार हाथ जल जाने के बाद हाथ का तुरंत हटना कांटा चुभने पर पैर पीछे हटना। कांटा चुभने पर पैर का पीछे हटना, सुई चुभ जाने पर हाथ का हटना आदि।

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