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बुरी नजर से आपके घर का बचाव करता है काले रंग का स्वास्तिक

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घर में नेगेटिव एनर्जी को दूर करने के लिए लोग अक्सर गणेश जी के प्रतीक स्वस्तिक को बनाते हैं। इसको मुख्य द्वार पर बनाया जाता है। वही पूजा के दौरान भी फिर बाद में स्वास्तिक बनाकर पूजा की जाती है। ज्यादातर स्वास्तिक लाल रंग से बनाया जाता है लेकिन आज हम आपको अलग-अलग रंगों के स्वस्तिक को के महत्व के बारे में बताएंगे।

आमतौर पर स्वास्तिक बनाने के लिए हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है। इसे घर के ईशान या उत्तर दिशा की दीवार पर बनाया जाता है।इससे घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। घर में किसी शुभ कार्य के लिए लाल रंग से स्वास्तिक बनाया जाता है। जिसमें केसर सिंदूर होली कुमकुम आदि का इस्तेमाल किया जाता है।

ग्रह प्रवेश या किसी शगुन के काम में लाल रंग के स्वास्थ्य को बनाया जाता है। घर में सकारात्मकता का वास होता है।

पीले रंग का स्वास्थ्य का अच्छी सेहत के लिए बनाया जाता है।

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अगर किसी को बुरी नजर लग गई होती आप बिजनेस अच्छे से ना चल रहा हो तो ऐसे में घर के मुख्य द्वार पर कोयले से स्वास्तिक बनाएं।

बाथरूम में गंदी जगहों पर स्वास्तिक चिन्ह ना बनाएं। ऐसा करने से बुद्धि का नाश होता है। घर में तनाव बीमारी कलह-क्लेश का माहौल बना रहता है। अक्सर लोग नए घर में प्रवेश करने पर पूजा करवाने के साथ ही घर की दीवारों और दरवाजों पर चिन्ह बनाते हैं। ऐसे में भी बाथरूम के दरवाजे पर भी स्वास्तिक बना देते हैं इसे शुभ नहीं माना जाता है।

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