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क्रेडिट कार्ड पर मिनिमम बैलेंस चुकाने के बावजूद भी भरनी पड़ सकती है भारी ब्याज, जानें क्या है बैंक के ये नियम..

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भारत में बढ़ते डिजिटलाइजेशन से कोई भी अधूरा नहीं है। कोई सरकारी कामकाज हो या फिर बैंक से जुड़ा कोई काम आजकल हर काम टेक्नोलॉजी के माध्यम से हो जाता है। ऐसे में देश में कैशलेस ट्रांजैक्शन का भी दौर काफी देखा जा रहा है। ऐसे में लोग क्रेडिट कार्ड का उपयोग अत्यधिक कर रहे हैं। कई बार मौके पर बैलेंस ना होने पर भी क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लोग खर्च कर लेते हैं और बाद में उसकी पेमेंट कर देते हैं।
वैसे तो क्रेडिट कार्ड का जमकर इस्तेमाल करना और सिर्फ मिनिमम पर करना आपके लिए थोड़ा और इसकी भी हो सकता है। भले ही सुनने में यह कुछ ज्यादा लग रहा हो, लेकिन क्रेडिट कार्ड के ब्याज के सिस्टम को यदि आप समझ जाएंगे तो आप कभी भी भारी नुकसान का घाटा नहीं मिलेंगे। यदि आप अपने क्रेडिट कार्ड से 10,000 रुपए का खर्चा करते हैं तो आपके पास जरूर 500 रुपए मिनिमम अमाउंट ड्यू करने का विकल्प उपलब्ध होता है। ऐसे नहीं समझने वाली बात यही है कि ऐसा करते समय आप बैंक के जाल में फस रहे हैं।
बिहारी कम लोग जानते हैं कि ऐसी स्थिति में प्रतिवर्ष 40% तक ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है। ऐसे में आपके पास कई विकल्प मौजूद होते हैं। जैसे पहला विकल्प पूरा भुगतान करने का होता है। दूसरा की तारीख मिनिमम अमाउंट ड्यू यानी कि 5% भुगतान का विकल्प होता है।
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मिनिमम अमाउंट डयू केस में हुई 95% राशि पर ब्याज प्राप्त होगी। MAD कार्ड कंपनियों द्वारा प्रदान की जाती है, जिसमें आप पूरी राशि की जगह 5% बिल का भुगतान कर सकते हैं।
बिलिंग पीरियड में यह 3-4% ब्याज के साथ जुड़कर मिल जाता है। एक साल में यह 40% से ज्यादा भी हो सकती है।
मान लीजिए यदि आपका क्रेडिट कार्ड हर महीने 10 तारीख को मिलता है तो फिर आपका नया महीना 11 तारीख से शुरू होगा और अगले महीने की 10 तारीख तक चलेगा। इस दौरान आपका किया हुए टांजेक्शन आपके बिल में नजर आएंगे। इसमें शापिंग नकद निकासी पेमेंट और अन्य तमाम खर्चे शामिल हो सकते हैं।
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