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यहाँ मौजूद है दुनिया का सबसे खतरनाक लैब, जहां जिंदा इंसानों पर किये जाते है शोध

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कोरोनावायरस को लेकर चीन की एक लैब इन दिनों काफी ज्यादा सुर्खियों में है। बुहान शहर में स्थित लैब को लेकर बहुत सारे देशों में बातें हो रही हैं। यहां कोरोनावायरस पर काम चल रहा था। जो लापरवाही से जानबूझकर लीक किया गया। हालांकि अभी तक कोई भी इस बात का सबूत नहीं मिला है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे खतरनाक लैब के बारे में बताने वाले हैं। जिसके सामने चीन का भी यह लैब कुछ नहीं है।

दरअसल शाही जापानी सेना के सैनिकों ने साल 1930 से 1939 के दौरान चीन के पिंगफांग जिले में ये प्रयोगशाला बना रखी थी। इस लैब का नाम था यूनिट 731 चीन का इससे कोई भी संबंध नहीं था। लेकिन लैब में किए गए प्रयोग चीन के लोगों पर ही होते थे जापान सरकार के पुरालेख विभाग के पास रखे दस्तावेजों में भी यूनिट 731 का जिक्र किया गया है। हालांकि बाद में उनके दस्तावेजों को जला दिया गया।

यूनिट 731 लैब में कई दर्दनाक प्रयोग किए गए जो मजबूत से मजबूत इंसानों को भी डरा सकते थे। इस लैब में जिंदा इंसानों को यातनाएं देने से लेकर एक खास प्रयोग था। फ्रॉस्टबाइट टेस्टिंग। योशिमुरा हिसातो नाम के एक वैज्ञानिक को इस प्रयोग में बहुत मजा आता था। वो ये देखने के लिए प्रयोग करते थे कि जमे हुए तापमान का शरीर पर क्या असर होता है। इस जांच को करने के लिए व्यक्ति के हाथ पैर ठंडे पानी में डुबो दिए जाते थे। जब व्यक्ति का शरीर पूरी तरह से सिकुड़ जाता था तो हाथ पैरों को तेज गर्म पानी में डाल दिया जाता था। इस प्रक्रिया के दौरान हाथ पर पानी में लकड़ी के चटकने की तरह आवाज किया करते थे और फटे हुए दिखाई देते थे इस जांच में कई लोगों की जान भी चली गई।

यूनिट 731 लैब में एक ‘Maruta’ नाम का शाखा था। इसका प्रयोग तो भयंकर यातना देने वाला था इस शाखा में हो रहे प्रयोग के तहत यह जानने की कोशिश हो रही थी कि आखिर इंसान का शरीर कितना टॉर्चर जेल सकता है। इसके लिए किसी व्यक्ति को बिना बेहोश किए धीरे-धीरे उसके शरीर का एक-एक अंग काटा जाता था।

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