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जानिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

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जन्माष्टमी इस बार 11 अगस्त को मनाई जाएगी। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। कृष्ण भक्त के इस दिन पर व्रत रखते हैं और केवल एक ही समय भोजन करते हैं। पौराणिक ग्रंथों और शास्त्रों के मुताबिक श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। भाद्रपद महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यदि रोहिणा नक्षत्र का भी संयोग हो तो वो और भी भाग्यशाली माना जाता है।

इस कृष्ण के व्रत वाले दिन सुबह स्नान करने के बाद सभी देवताओं की तरफ उत्तर मुख करके बैठे। हाथ में जल फल और पुष्प लेकर संकल्प करके मध्यमा के बीच काले तिलों के जल से स्नान करने के लिए देव की माता के लिए प्रसुतिगृह बनाएं। उसके बाद सूतिका ग्रह में बच्चों ने को बिछाकर उस पर कलश की स्थापना करें।

इसके बाद देवकी माता की स्तनपान कराती हुए किसी चित्र की स्थापना करें। इस पूजा में देवकी वसुदेव बलराम नंद यशोदा और लक्ष्मी जी इन सब का नाम लेते हुए पूजा करें। आपको बता दें कि यह व्रत रात के 12:00 बजे खोला जाता है

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