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PM MLY के इन business Idea से हो सकती है आपकी भी अच्छी कमाई, लोन पर भी मिलेंगी कई सुविधाएँ..

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यह तो आप सभी जानते हैं कि मोदी सरकार के कार्यकाल के शुरू होते से ही सरकार द्वारा कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिनसे आम आदमी की अर्थ व्वस्था को उसे  चलाने में आसानी आसानी हो ऐसे में सरकार द्वारा लिए गए कई फैसले आम आदमी के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हुए हैं।
इसी कड़ी में सरकार द्वारा दिए गए 6 फैसले ऐसे हैं जो कि आम आदमी पर काफी असर दिखाने वाले हैं। इन फैसलों को एक जुलाई से बदलने के बारे में सोचा जा रहा है। आइए जानते हैं कौन से हैं यह 6 फैसले-
सरकार द्वारा चलाई जाने वाली मुद्रा लोन योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले शिशु लोन की ब्याज दरों में 2% तक की छूट दी जाएगी आपको बता दें कि शिशु लोन के अंतर्गत ₹50000 का लोन दीया जाता है यह सुविधा 1 जून 2020 से लागू की गई है अब इस योजना को लेकर 30 मई 2021 तक के लिए बढ़ाया जाएगा।
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 इसके साथ साथ RBI द्वारा भी एक अहम फैसला लिया गया है इस फैसले के अंतर्गत सहकारी बैंकों को आरबीआई के अधीन रखने को लेकर अध्यादेश जारी किया गया है खड़ा धारकों की चिंताओं को दूर करने के लिए इस फैसले पर अमल किया जा रहा है।
तीसरे चकले की बात की जाए तो यह फैसला पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर है सरकार द्वारा पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए एनिमल्स हसबेंडरी डेवलपमेंट फंड को मंजूरी दे दी गई है जिसके अंतर्गत सरकार कर्ज लेने वालों को 3% की ब्याज पर छूट देगी
इतना ही नहीं, ओबीसी कमिशन के कार्यालय को 6 महीने के लिए आगे की ओर अग्रसर किया जाएगा। ओबीसी आयोग रिपोर्ट 31 जनवरी 2021 तक दे सकता है। सरकार ने फैसला संविधान के अनुच्छेद 340 के अंतर्गत जारी किया है। कमीशन को पिछड़े वर्ग की कैटेगरी के मसले की जांच करने के लिए ज्यादा समय मिल पाएगा।
इस स्कीम के तहत कर लगभग 20 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं। इस स्कीम के माध्यम से छोटे कारोबारी सरकार से 10 लाख रुपए तक का लोन प्राप्त कर सकते हैं  यदि आप अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट दिखाकर किसी कारोबार के लिए योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो यह योजना आपके लिए काफी लाभदायक होगी, क्योंकि इस योजना के अंतर्गत कारोबारी को पूरे खर्चे का 80% लोन के रूप में दिया जाता है।
बेकरी प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट
ऐसे में आज हम आपको मुद्रा लोन के साथ बेकरी प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के बारे में जानकारी देने वाले हैं। आपको बता दें कि यह जो समय अभी चल रहा है उसमें बेकरी प्रोडक्ट की हर सीजन में ही डिमांड बनी रहती है। बैटरी इंडस्ट्रीज फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज के इंडस्ट्रियल इक्विटी मैं एक बड़ा योगदान करती है। मौजूदा समय में बेकरी इंडस्ट्री के भीतर कई प्रकार के प्रोडक्ट हैं जैसे कि बिस्कुट, ब्रेड, केक, चिप्स इत्यादि इन प्रोडक्ट की डिमांड शहरों में ही नहीं, टाउन एरिया और गांव में भी काफी देखी जा रही है। इन प्रोडक्ट का होम कंजक्शन भी बढ़ चुका है। अब फूड टेक्नोलॉजी में जिस तरह के बदलाव देखे जा रहे हैं। उस हिसाब से इस बिजनेस की डिमांड भी काफी तेजी से बढ़ रही है।
देखा जाए तो मार्केट में एक अच्छी प्रतियोगिता भी इस व्यवसाय को लेकर बनी हुई है। इनका मार्केट पोटेंशियल काफी अच्छा है और क्वालिटी कंट्रोल भी बेहद आसान है। इस प्रोजेक्ट की बात की जाए तो महीना री पर आने वाला खर्चा 350 लाख रुपए तक होगा। वहीं वर्किंग कैपिटल को अलग किया जाए तो 186 लाख रुपए की आवश्यकता आपको होगी। यदि आपके पास खुद का वर्किंग प्लेस है तो उस पर कारोबार किया जा सकता है। या लैंड को किराए पर भी लेकर अपना काम चालू कर सकते हैं। वर्किंग कैपिटल में 25 दिनों के लिए रो मटेरियल फिनिश्ड गुड्स का चौक वर्किंग एक्सपेंस और रिसिवेबल आदि शामिल किए जाते हैं।
वहीं, इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए फाइनेंस की बात की जाए तो मुद्रा स्कीम के अंतर्गत यदि आप इस बिजनेस को शुरू करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको बिजनेस के 100% खर्च में से 80% तक का लोन आपको प्राप्त होगा। सरकार ने जो प्रोजेक्ट रिपोर्ट दी है उसके मुताबिक, इसमें वर्किंग कैपिटल लोन 1.49 लाख और टर्म लोन 2.96 लाख रुपए का होगा। इसका मतलब यह है कि आपको अपने पास से केवल एक लाख रुपए की राशि निवेश करनी होगी।
यदि आप भी इस व्यवसाय को शुरू करना चाहते हैं तो इसके लिए आवेदन करने के लिए काफी आसान प्रक्रिया को फॉलो करना होगा। देश में 27 सरकारी बैंक, निजी क्षेत्र के 17 बैंक, 31 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक 4, 36 माइक्रो फाइनेंस संस्थान और 25 गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां ऐसी है जो मुद्रा लोन बांटने के लिए अधिकृत हैं।
पेपर नैपकिन का बिजनेस
कोरोना वायरस के चलते जहां एक तरफ लोग साफ सफाई की ओर अग्रसर हुए हैं। वहीं साफ-सफाई के साथ कुछ चीजों की डिमांड बाजार में काफी बढ़ने लगी है। बाजार खुलने के बाद इसका असर साफ दिखाई देने वाला है। लाइफ स्टाइल बदलने से पेपर नैपकिन की मांग भी काफी तेजी से बढ़ने वाली है। चाहे वह हॉस्पिटल, ऑफिस, होटल, रेस्टोरेंट जो भी हो टिश्यू पेपर की आवश्यकता आपको होगी ही अब यह लोगों के निजी जीवन का भी एक हिस्सा बनने वाले हैं। इसी के चलते आज हम आपको बिजनेस का तरीका बताने जा रहे हैं जो आप पेपर नैपकिन से शुरू कर सकते हैं, जिससे आपको सरकार की मदद भी मिलेगी।
आपको बता दें कि टिशू पेपर की डिमांड बढ़ने के साथ-साथ इस ग्रुप में भी काफी अच्छा स्कोप नजर आ रहा है। कारोबार में मार्केट में अपनी जगह काफी बड़ा ली है। यदि आप विश करने का सोच रहे हैं तो यह आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। इस बिजनेस को शुरू करने के लिए आप कम लागत में अच्छा मुनाफा कर सकते हैं। इसके साथ-साथ इस बिजनेस को शुरू करने में सरकार से भी मदद प्राप्त होगी।
वहीं, यदि इस व्यवसाय में निवेश की बात करें तो इस बिजनेस को शुरू करने के लिए आपको 3.50 लाख रुपए का शुरुआती निवेश करना होगा। यदि आप 3.50 लाख रुपए का निवेश इस व्यवसाय में कर देती है तो आप इस बिजनेस को बड़ी आसानी से शुरू कर सकते हैं। इतने पैसे होने पर आप किसी भी बैंक के पास मुद्रा योजना के तहत लोन प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं तो आपको शर्म लोन के तौर पर तीन लाख दस हजार रुपए का टर्नओवर दिखाकर वर्किंग कैपिटल लोन के रूप में बैंक द्वारा 5.30 लाख रुपए का लोन प्राप्त हो सकता है।
इस व्यवसाय से होने वाली कमाई की बात की जाए तो टिशु पेपर का बिजनेस काफी अच्छा विकल्प है। इस दिन से आप 1 साल में 1.50 लाख किलोग्राम पेपर नैपकिन का ही प्रोडक्शन कर पाएंगे, जिससे ज्यादा करने के लिए आप को मंजूरी लेने के लिए सरकारी दफ्तरों और उत्पादन के बाद इसको बाजार में 65 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा सकता है। यदि आप 1 साल में 1.50 लाख पेपर नैपकिन का प्रोडक्शन करते हैं और 65 रुपए के हिसाब से इसे बेचते हैं तो साल भर में आप का टर्नओवर 97.50 लाख रुपए हो जाएगा। वहीं यदि इसमें बाकी का खर्च निकाल दिया जाए तो 1 साल में आप लगभग 10 से 12 लाख रुपए की कमाई आराम से कर पाएंगे।
वहीं, यदि इस व्यवसाय में खर्चे की बात की जाए तो इस बिजनेस को शुरू करने के लिए आपको मशीनरी पर लगभग 4.40 लाख रुपए का खर्च करना होगा जो कि सिर्फ एक बार का ही खर्च है, क्योंकि मशीन हर साल नहीं बदली जाती। वहीं रॉ मटेरियल की बात करें तो 7.13 लाख रुपए मटेरियल पर खर्च होगा। बाकी यदि अन्य खर्चो की बात की जाए तो कंजूबल ट्रांसपोर्ट स्टेशनरी टेलिफोन मेंटेनेंस बिजली आदि का मिलाकर खर्चा 11 लाख रुपए तक पहुंचेगा। इसके बावजूद भी आप हर साल लगभग 12 लाख रुपए की कमाई कर पाएंगे।
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