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भारत और चीन के द्विपक्षीय कारोबार में कटौती होने की आशंका, भारतीय अर्थव्यवस्था को भी पहुंचेगा थोड़ा नुकसान..

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जैसा कि आप सभी जानते हैं भारत और चीन की सीमा पर वर्तमान समय में तनाव का माहौल चल रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा लगातार चीनी सामान का बहिष्कार करने के लिए कहा जा रहा है।
ऐसे में भारतीय रेलवे ने चीनी कंपनी से 471 करोड़ रुपए के ठेके को वापस छीन लिया है। इतना ही नहीं, ग्लोबल लीडर बनने की रेस में दौड़ना चाहिए को लद्दाख में विवाद और झड़प में भारतीय जवानों की शहादत की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
भारत में चीन और उसकी कंपनियों उत्पादों को लेकर भयंकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। हर तरफ चीनी सामान का बहिष्कार की भारी मांग होती नजर आ रही है। 2019 के दौरान नॉमिनल जीडीपी साइज के मामले में 14.14 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीनी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। चीनी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कंपोनेंट स्मार्टफोन में भी आता है। ऐसे में भारतीय बाजार में चीन के सबसे बड़े बाजारों में से एक है।
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बढ़ती बहिष्कार की मांग के चलते कैसे और कितने समय में भारत चीन के कारोबारी चंगुल से बाहर निकल पाएगा। इसका पता आने वाले दिनों में ही लग सकता है। लेकिन कई बड़े शहरों में भारत चीन पर निर्भर है। एप्पल सीसीआई के अनुसार भारत में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में चीन का 40% निवेश है, जबकि मेटालर्जिकल इंडस्ट्रीज मैं झींगा 17% निवेश है। भारतीय स्मार्टफोन बाजार में भी चीन का 70% हिस्सा है।
यह बात और है कि चीन के साथ भारत का द्विपक्षीय कारोबार साल 2017-18 के मुकाबले 2018-19 में में काफी नीचे गिर चुका है जो 89.71 बिलियन डॉलर के मुकाबले साल दो 2018-19 में 87.07 अमेरिकी डॉलर था। साल 2018 में भारत में 70.32 billion-dollar चीन से आयात किया। वहीं इसी अवधि में हमारा निर्यात केवल 16.75 डॉलर रहा मौजूदा चुनाव के बाद दोनों देशों का द्विपक्षीय कारोबार और नीचे आ जाएगा।
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