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क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने वाले लोगों के साथ हुआ धोखा, जानें कितनी गई रकम..

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धोखाधड़ी के मामले सामने आना एक आम बात हो गई है। जैसा कि आप सभी जानते हैं थोड़े ही समय पहले 2 अरबपति लोगों नीरज और मेहुल ने पंजाब नेशनल बैंक को करोड़ों का चूना लगाकर धोखा दिया था, जिससे कुछ ही समय पहले उनकी सारी प्रॉपर्टी को जप्त कर लिया गया है। ऐसे में अगर क्रिप्टोकरंसी से जुड़ा मामला देखा जा रहा है।
क्रिप्टो करेंसी से जुड़ी एक कंपनी के संस्थापक का हैरान करने वाला कबूल नामा सामने आया है। इस कबूलनामे में संस्थापक में अनजान निरीक्षकों को फंसाने और शपथ लगाने की बात स्वीकार की है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो संस्थापक ने बताया कि अपनी कंपनी के माध्यम से नए निर्देशकों को 25 करोड़ डॉलर यानी कि 190 करोड़ रुपए का चूना लगा चुके हैं।
ऐसे में अब आपके दिमाग में ही यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर क्रिप्टोकरंसी होता क्या है तो आपको बता दें कि क्रिप्टोकरंसी डिजिटल करेंसी होती है जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित होती है। इस करेंसी में कूट लेखन तकनीक का प्रयोग किया जाता है। टेक्निक के माध्यम से करंसी के ट्रांजैक्शन का पूरा लेखा-जोखा होता है, जिससे इसे हैक करना बहुत मुश्किल होता है। यही वजह है कि क्रिप्टोकरंसी में धोखाधड़ी की संभावना बहुत कम होती है। परिचालन केंद्रीय बैंक से स्वतंत्र होता है जो कि इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।
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फ्रॉक और उनके दो अन्य साथियों ने एक नामक कंपनी की स्थापना की जिसमें उनके साथ सौरभ शर्मा और रेमंड अपनी भी शामिल हुए। इन लोगों पर साल 2018 में धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप लग चुका है। उन्होंने निवेशकों को धोखा दिया था, जिसके चलते उन्हें धोखाधड़ी और जालसाजी के केस में धक्के खाने पड़े।
निवेशकों के साथ धोखे की बात की जाए तो ऐसी झूठी कंपनी द्वारा निदेशकों से कहा गया था कि वे वीजा या मास्टर कार्ड द्वारा भुगतान स्वीकार करने वाले किसी भी मंच पर डिजिटल करेंसी के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं।
आपको बता दें कि शर्मा और अपनी के खिलाफ नवंबर में अमेरिकी अदालत में मुकदमा शुरू किया गया था। फ्रॉक्स को मैनहट्टन की अदालत में गुनहगार साबित कर दिया गया था। अमेरिका की निचली अदालत में दोषी पाए गए फ्रॉक सिक्योरिटीज की धोखाधड़ी और जालसाजी माना था और उन्हें सजा दी गई थी।
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