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क्या आप जानते हैं PF खाते पर मिलता है मुफ्त में 6 लाख का फायदा, जानें क्या कहते हैं EPFO के नियम..

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कम ब्याज दरों के होने के बावजूद भी पब्लिक प्रोविडेंट फंड लोगों के बीच बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय निवेश है। पीएफ खाता खोलते ही आपको बाय डिफ़ॉल्ट बीमा भी मिल जाता है। ईडीएलआई योजना के अंतर्गत आपके पीएफ खाते पर 6 लाख रुपए का इंश्योरेंस दिया जाता है। यह योजना एम्पलाइज डिपॉजिट लिंक इंश्योरेंस होती है। आधार से लिंक करने पर आपने यूएएन नंबर के द्वारा अपने सभी पीएफ खातों को लिंक करना होता है।
आपको बता दें कि यह एक लोंग टर्म प्लान है। इसमें मेच्योरिटी पीरियड 15 साल का होता है लेकिन अगर आप चाहे तो 15 साल के बाद भी इसका बेनिफिट ले सकते हैं। 15 साल की अवधि खत्म होने के बाद आप 5 साल के लिए अपनी डिपॉजिट को बढ़ा सकते हैं। इस को आगे जारी रखा जा सकता है। इसके लिए आपको एक नए पीपीएफ खाते को शुरू करना होगा। उसे 15 साल तक जारी रखने की आवश्यकता नहीं होगी

ईपीएफओ अंश धारकों की संख्या 9 करोड़ तक हो जाएगी। इपीएफ एक्ट के अंतर्गत कर्मचारी की बेसिक सैलरी प्लस डीए का 12% पीएफ खाते में जाता है। वही कंपनी भी कर्मचारी के वेतन में डीए का 12% कंट्रीब्यूशन करती है। कंपनी के 12% कंट्रीब्यूशन को मिलाकर 3.67% कर्मचारियों के पीएफ खाते में जाता है। बाकी 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन स्कीम में जाता है। आपको बता दें कि यह पूरी तरह कर रहित होता है। आयकर की धारा 80 सी के तहत आपको इस पर टैक्स भी नहीं देना होता है।

 

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अब बात करते हैं अपने पीएफ खाते की अवधि को बढ़ाने की पीएफ खाते को 15 साल की अवधि के बाद सब्सक्रिप्शन के साथ और बिना इसके भी बढ़ाया जा सकता है। खाते में योगदान के नियम 15 साल की अवधि के समान रहते हैं। एक बार 5 साल के लिए जब आप इसको बढ़ाने का विकल्प चुनते हैं तो इसको फिर से बदला नहीं जा सकता। निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना बड़ा ही जरूरी है कि एक बार खाते को किसी साल के लिए योगदान के बिना जारी रखने पर सब्सक्राइबर इसे योगदान वाले विकल्प में नहीं बदल सकता।
इस प्रकार कर सकते हैं इंश्योरेंस क्लेम
जैसा कि हमने भी बताया कि आपको पीएफ खाते पर बाय डिफॉल्ट बीमा कावर प्राप्त होता है। ऐसे में पीएफ खाता धारक की मृत्यु होने पर अकाउंट का नार्मल इंश्योरेंस अमाउंट के लिए क्लेम कर सकता है। इसके लिए इंश्योरेंस कंपनी को द सर्टिफिकेट सकसेशन सर्टिफिकेट और बैंक की जानकारियां देनी होती है।
यदि पीएफ खाते का कोई नॉमिनी नहीं है तो फिर कानूनी रूप से पीएफ खाता धारक का उत्तराधिकारी इस धनराशि पर क्लेम कर सकता है। यह खाते से पैसा निकालने के लिए एंप्लायर के पास जमा होने वाले फॉर्म के साथ इंश्योरेंस कवर का फॉर्म भी जमा कर देना होगा। इस फॉर्म को एंपायर सत्यापित करता है। इसके बाद में इंश्योरेंस का पैसा आपको मिलता है।
बात यदि इसकी लिक्विडिटी की की जाए तो आपको बता दें कि जो निवेशक अपने खाते को दोबारा सब्सक्रिप्शन के साथ जारी रख रहे हैं, वे बैलेंस के 60% तक की राशि को विद्रोह भी कर सकते हैं। यह राशि आप हर बड़ी हुई अवधि की शुरुआत में 1 या उससे ज्यादा किस्त भी निकाल सकते हैं, लेकिन यह साल के केवल एक ही बार निकाला जा सकता है।
वैसे तो 5 साल की अवधि के दौरान मार्च 2019 तक आप केवल 9 लाख रुपए ही निकाल सकते हैं, जो आपके 31 मार्च 2014 के अनुसार बैलेंस का 60% होगा। लेकिन अगर आप आगे निवेश जारी रखना नहीं चाहते हैं तो आप टैक्स पर ब्याज कमाना चाहते हैं लेकिन आगे और फंड नहीं देना चाहते तो यह भी हो सकता है।
यदि अकाउंट बिना किसी योगदान के बढ़ाया जाता है, तो राशि को बिना किसी पाबंदी के विद्रोही किया जा सकता है। हर साल एक ही विड्रोल की अनुमति दी जाती है। बैलेंस पर ब्याज जारी रहेगी, जब तक उसे पूरी तरह विद्रोह नहीं किया जाता है। इसके लिए निवेशक को पोस्ट ऑफिस या बैंक जहां भी आप का खाता खोला है। वहां सब्सक्रिप्शन जारी रखने के लिए फॉर्म भरना होगा।
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