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पृथ्वी पर पानी आने के पीछे छुपा है एक गहरा राज, हैरान कर देंगे ये रहस्य

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हमारी आकाशगंगा में कई खत्म हो रहे तारे होते हैं जो क्षुद्र ग्रह के अवशेष होते हैं। ठोस पत्थर के गोले के तौर पर यह किसी तारे पर गिरकर खत्म हो जाते हैं तारों के वायुमंडल पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक यह पत्थर के बने होते हैं। लेकिन इनमें काफी पानी भी मौजूद होता है। इस नतीजे के आधार पर इस सवाल का उत्तर मिल सकता है कि पृथ्वी का पानी आखिरकार कहां से आया है।

हालांकि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हमारी आकाशगंगा में कई सारे ऐसे ग्रह होते हैं। जिनमें काफी ज्यादा पानी होता है। यही पानी ब्रह्म पर पानी की आपूर्ति करता है। जीवन को आगे बढ़ाता है। ब्रिटेन की वर्क यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा है कि हमारे शोध से इस बात का पता चलता है कि जिस तरह से ज्यादा पानी वाले ग्रह की बात हो रही है। वैसे तो यह ग्रह हमारे सौरमंडल में काफी ज्यादा संख्या में पाए जाते हैं।

शोधकर्ताओं ने यह सवाल भी उठाया था कि पृथ्वी पर इतना सारा पानी कहां से आया। काफी पहले पृथ्वी बहुत सुखी और बंजर हुआ करती थी इसकी टक्कर कहीं किसी सादा वाले इस ग्रह से हुई होगी जिसके बाद यहां पर इतना सारा पानी आ गया।

अपने शोध को विश्वसनीय बनाने के लिए बनाने के लिए राडी को ये दर्शाना था। कि ज्यादा जल वाले ग्रहों की मौजूदगी सामान्य बात है। इसके लिए उन्हें पुराने तारों के बारे में जानकारी की जरूरत पड़ी अब तारा अपने अंत की ओर बढ़ता रहा और सफेद रंग के बौने तारे में बदलने लगा। उसका आकार भले ही छोटा हो जाता है। लेकिन उसके गुरुत्वाकर्षण बल में कोई कमी नहीं आती। अपने आसपास से गुजरने वाले ग्रह अपने वायुमंडल में खींचने की ताकत रखता है।

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इन पत्थरों की टक्कर से पता लगता है कि यह पत्थर किस चीज के बने हैं। ऑक्सीजन और हाइड्रोजन जैसे रासायनिक तत्व अलग-अलग ढंग से रोशनी को ग्रहण करते हैं। राडी के शोध दल ने खत्म हो रहे तारों पर पड़ने वाली रोशनी के पैटर्न का अध्ययन किया है। कनेरी द्वीप समूह पर स्थित विलियम हर्शेल टेलीस्कोप की मदद से ये अध्ययन किया गया। कैनरी द्वीप समूह पर स्थित विलियम टेलिस्कोप की मदद से यह अध्ययन किया गया दाढ़ी और उसके सहयोगियों ने 500 प्रकाश वर्ष दूर हो रहे तारों पर शोध किया। उन्होंने बिखरे हुए ग्रह के रासायनिक संतुलन को आंकने की कोशिश की उन्होंने पाया कि उनके अलावा पानी भी बहुत ज्यादा है ।

हाल के सालों में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने हमारे सोलर सिस्टम के बाहर कई ग्रहों का पता लगाया है। केपलर टेलीस्कोप ने अकेले हजार से ज्यादा ग्रहों को ढूंढ निकाला है। ऐसे बाहरी ग्रह पर जीवन हो सकता है। अगर इनका आकार पृथ्वी के समान हो तो यह अपने तारे के गोल्डीलॉक्स जोन में यानी पृथ्वी की तरह जहां तापमान ना हो वहां बहुत ज्यादा हो और ना ही बहुत कम यह उन पर जीवन की संभावना हो सकती है।

शोध के सह लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑफ वॉरिक के प्रोफेसर बोरिस गैनसिक के मुताबिक जल वाले क्षुद्र ग्रहों में संभवत ऐसे ग्रहों तक कि पानी पहुंचाया होगा। हम जानते हैं कि जल के बिना जीवन के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती। हालांकि वैज्ञानिक इस बात को मानते हैं कि अगर किसी बाहरी ग्रह पर जीवन की मौजूदगी होगी तो उसका पता लगाना बेहद मुश्किल काम होने वाला है।

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