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होना पड़ रहा है भ्रष्टाचार का शिकार तो करें केंद्रीय सतर्कता आयोग को शिकायत, सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान रहेगी गुप्त..

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कोरोना वायरस ही नहीं देश की नीव भ्रष्टाचार और घूसखोरी ने भी बुरी तरह जकड़ कर रखी हुई है। कई सरकारी दफ्तरों में ऐसा देखा जाता है कि लोग घूस देकर अपने काम जल्दी कराना चाहते हैं और कई लोग भी ऐसे हैं जो घूस लेकर गलत काम भी कर देते हैं।

कई बार एक आम आदमी रिश्वत और घूसखोरी का शिकार होता है। लेकिन वह समझ नहीं पाता कि इस सब का वह क्या करें और क्या नहीं आए दिन भ्रष्टाचार के मामले देखे जाते हैं।

भ्रष्टाचार से काम करने वाला कोई भी व्यक्ति ले वह कितने ही ऊंचे पद पर क्यों ना बैठा हो, यदि उसकी शिकायत कर दी जाए तो वह परेशान हो उठता है। वैसे तो केवल रिश्वत लेना ही अपराध नहीं है, बल्कि विश्व देने वाला भी अपराधी माना जाता है। लेकिन यदि कोई इस तरह की शिकायत कर देता है तो भ्रष्टाचार व्यक्ति उस से बच नहीं सकता।

आपको बता दें कि भ्रष्टाचार की सूचना देने वाला व्यक्ति और उसकी पहचान पूरी तरह सतर्कता आयोग द्वारा गुप्त रखी जाती है, जिससे सूचना देने वाले व्यक्ति को किसी प्रकार की हानि ना पहुंच सके।
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अगर आपने भी ऐसे किसी भ्रष्टाचार व्यक्ति से सामना किया है या फिर आप खुद भ्रष्टाचार का शिकार हो चुके हैं। जहां आप को जबरन रिश्वत देनी पड़ी हो ऐसी स्थिति में आप अपनी खुद की मदद कर सकते हैं। ऐसा आप उस रिश्वतखोर व्यक्ति की शिकायत करके कर सकते हैं। इस शिकायत को आप केंद्रीय सतर्कता आयोग के पते पर एक लेटर के माध्यम से भी भेज सकते हैं।
सतर्कता भवन ए ब्लॉक, जीपीओ कंपलेक्स, आईएनए, नई दिल्ली 110 023 पर आपको अपना शिकायत पत्र भेजना होगा। इसके साथ ही आप 01124600200 पर एक फोन कॉल द्वारा भी जानकारी दे सकते हैं। इतना ही नहीं, आप यह शिकायत फैक्स के माध्यम से भी कर सकते हैं। 01124651010 24 651186 यह है केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा जारी किया सेक्स नंबर है।
आपको बता दें कि आयोग को भी कुछ अधिकार प्राप्त हैं। आयोग को प्राप्त हुए अधिकारों मिले हुए है कि वे किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच स्वयं कर सकते हैं या फिर किसी और के माध्यम से भी करवा सकते हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम 2003 में निर्मित हुआ था। केंद्र सरकार के मंत्रियों के विभाग सरकार के सार्वजनिक उपक्रम नेशनल बैंक और बीमा कंपनियां आदि केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित होती हैं।
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