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भारत में है इतना अनाज मौजूद की डेढ़ साल तक गरीबों को मुफ्त खिलाया जा सकता है खाना, जानें भंडार की हालत..

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जैसा कि आप सभी जानते हैं कोरोना वायरस का कोहराम भारत में भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। भारत के 538 जिलों में सरकार ने पूर्णता लॉक डाउन की घोषणा कर दी है। बाजार कारोबारियों गतिविधियां और कंपनियां भी पूरी तरह बंद है। ऐसे में गरीब मजदूरों रोजमर्रा के काम करने वालों और छोटे स्तर के कर्मचारियों पर काफी दबाव देखने को मिल रहा है। ऐसी स्थिति में यूपी और दिल्ली समेत कई राज्यों की सरकारों ने राशन में छूट देने का ऐलान कर दिया है। ऐसे हालत में सवाल यह उठता है कि भारत में कितने दिनों तक उनकी स्थिति में गरीबों को भोजन उपलब्ध करा सकता है।
यदि बात की जाए भारत में मौजूद अनाथ की तो भारत के पास करीब डेढ़ साल के लिए भंडार में इतना भोजन के लिए अनाज पहले से है, जिसका प्रयोग देश के नोखड़ा उनकी स्थिति में होने पर गरीबों के भोजन के लिए बड़ी आराम से किया जा सकता है। इतना ही नहीं, आने वाले दिनों में नई फसल के साथ ही राशन के भंडार में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी।
आपको बता दें कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन डीवी प्रसाद ने इस बात की जानकारी दी कि देश में खदान की कोई कमी नहीं है। देशभर में खाद्यान्न के वितरण के काम को यही संस्था सुचारू रूप से चला दी है। देशभर में गरीबों में बांटने के लिए लगभग 50 से 60 मिलियन राशन की आवश्यकता होती है। वहीं अप्रैल के अंत तक देश के पास 100 मिलीयन टन खाद्यान्न उपलब्ध होगा। साल 2019 में भारत में 292 मिलियन टर्न रिकॉर्ड खाद्यान्न के उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है।
 ऐसे में चेयरमैन ने आगे बताया कि किसी भी हिस्से में खाद्यान्न की आपूर्ति के लिहाज से चिंता की बात नहीं है। वैसे तो कई राज्यों में भंडारण की समस्या पहले से है और वह बड़ी मात्रा में राशन नहीं जमा कर सकते। आपको बता दें कि खाद्यान्न आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान ने गुजरे सप्ताह में यह जानकारी दी कि कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी 6 महीने के लिए राशन एडवांस में लेकर रख सकते हैं।
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आपको बता दे कि कोरोनावायरस के चलते देश में कई राज्यों में 31 मार्च तक पूरी तरह लॉक डाउन की स्थिति बनी रहेगी। अभी तक की खबर के अनुसार भारत में 511 लोगों की मृत्यु पूर्णा वायरस के चलते हो चुकी है। इतना ही नहीं,दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 4 लाख से भी ऊपर पहुंच चुकी है।
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