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एक मंदिर में काफी बड़ा पत्थर रखा हुआ था, पंडित ने उसे देखा और सोचा कि इस पत्थर को तराशकर उसकी मूर्ति बनवानी चाहिए, इसके लिए उसने एक मूर्तिकार को बुलाया और

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एक बहुत ही पुरानी लोक कथा के मुताबिक पुराने समय में एक मंदिर में बहुत बड़ा पत्थर रखा हुआ था उस मंदिर के पुजारी ने सोचा किस पत्थर को तराश कर क्यों नहीं इसकी मूर्ति बन वाले नहीं चाहिए इसके बाद उसने एक मूर्तिकार को भी बुलाया और पत्थर तराश कर शिव जी की मूर्ति बनाने का हुक्म दिया।

मुझे कार ने पत्र को तराशने के लिए उसे तोड़ने का प्रयास भी शुरू कर दिया मूर्तिकार हथौड़ी से पत्थर पर बार-बार छूट दे रहा था लेकिन उसे सफलता ही मिलने का नाम नहीं ले रही थी क्योंकि वह पत्थर बहुत ज्यादा कठोर था और बार-बार उसके हटोरी मारने पर भी वह असफल रहा वह बहुत ज्यादा प्यार करने के बाद थक चुका था और उसने हार मानकर उस मंदिर के पुजारी से कहा कि वह काम नहीं कर सकता क्योंकि पत्थर बहुत ज्यादा कठोर है और टूट नहीं रहा है इन सब बातों को बोलकर वह मूर्तिकार वहां से चला गया।
पंडित ने इस काम को करने के लिए दूसरे दिन दूसरे मूर्तिकार को बुलवाया दूसरे मूर्तिकार ने जैसे ही हथौड़ी का पहला बार उस पत्थर पर किया वैसे ही हो पत्थर टूट गया मूर्तिकार ने बार-बार प्यास करके शिव जी की सुंदर मूर्ति बना दी इन सभी बातों को देखकर पुजारी पूरी तरह से समझ गया और उसने सोचा कि पहले मूर्तिकार बहारों के पत्थर कमजोर हो चुके थे अगर वह सिर्फ एक बार करता तो पूरा काम आसानी से हो जाता।
प्रसंग से सीख
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कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें सफलता मिलने तक बार-बार प्रयास करने चाहिए अगर हमें बार-बार असफलता मिलती है और हम काम छोड़ देते हैं तो हम अपने लक्ष्य तक कभी भी नहीं पहुंच पाते हैं इसलिए हमें अपने काम को रोकना नहीं चाहिए बल्कि उसमें बार-बार प्यास करने चाहिए।

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