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इजराइल का वो जासूस जो बनने वाला था सीरिया का रक्षा मंत्री, मिली फांसी की सजा

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आपने अक्सर फिल्मों में देखा होगा कि जासूस किस तरह सबसे अपनी पहचान छिपाकर जासूसी करते हैं. फिल्मों में यह जितना आसान लगता है, लेकिन असल जिंदगी मे उतना ही मुश्किल है. अगर कोई जासूस किसी दूसरे देश में पकड़ा जाता है तो उसे कड़ी सजा दी जाती है. एली कोवेन इजराइल की खुफिया एजेंसी के जासूस थे, जो एक समय सीरिया के रक्षा मंत्री बनने वाले थे. लेकिन जब वह पकड़े गए तो उन्हें बहुत ही भयानक सजा दी गई थी. उन्हें बीच चौराहे पर सैकड़ों लोगों के सामने फांसी दी गई थी.

एली कोवेन ने खुफिया जानकारी जुटाई जिसकी वजह से 1967 के अरब-इजरायल युद्ध में इजराइल को जीत मिली थी. लेकिन वह 1961 से 1965 के बीच एक जासूस के रूप में अपने दुश्मनों के बीच सीरिया में 4 साल तक रहे. उन्होंने अपनी पहचान एक कारोबारी के रूप में बना ली थी. वह सीरिया की सत्ता के बहुत करीब पहुंच गए थे. लेकिन किसी तरह से उनकी पोल खुल गई.

एली कोवेन ने सीरिया की कई खुफिया जानकारी भेजी. लेकिन सीरिया के काउंटर इंटेलिजेंस अधिकारियों को उनके बारे में जानकारी मिली और उन्हें रंगे हाथों पकड़ा गया, जिसके बाद उनके ऊपर मुकदमा चला और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई. 18 मई 1965 को दमिश्क में उन्हें सार्वजनिक चौराहे पर फांसी पर लटका दिया गया.

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