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….तो इसलिए दुनिया की सबसे पावरफुल करेंसी है डॉलर, जानिए डॉलर से जुड़े कुछ ऐसे ही रोचक तथ्य

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आपने अक्सर सुना होगा कि देशों की करेंसी की तुलना अमेरिकी डॉलर से की जाती है जैसे अमेरिकी डॉलर के सामने कोई करेंसी कितना मजबूत है. भारत की बात करें तो डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार अपनी मजबूती बनाए हुए है. बता दें कि डॉलर के मुकाबले 73 रुपए के नीचे फिसलने वाला रुपया फिलहाल 69.12 के स्तर पर कारोबार कर रहा है.

जैसा हमने बताया कि भारतीय रुपए के साथ ही, दुनियाभर में अन्य करंसी का आकलन भी डॉलर के हिसाब से ही किया जाता है. दरअसल ऐसा इसलिए क्योंकि डॉलर को दुनिया की पावरफुल करंसी भी कहा जाता है. लेकिन, ऐसा क्यों है कि दुनिया की बाकी करंसी की तुलना सिर्फ डॉलर से ही होती है. दरअसल इसके पीछे का कारण बहुत कम ही लोग जानते हैं. चलिए जानते हैं इसके बारे में..

इस कारण से डॉलर है पावरफुल करंसी

आपको बता दें कि दुनिया में कई तरह की करंसी हैं जैसे रुपया, युआन, यूरो, पाउंड. बावजूद इसके दुनियाभर में डॉलर से ही लेन-देन होता है. दरअसल डॉलर को ही विश्व के हर देश के लिए अंतरराष्ट्रीय करंसी माना जाता है. इसके पीछे कई कारण हैं. चलिए इन कारणों के बारे में जानते हैं..

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सोना

आपको बता दें कि दुनिया में सबसे ज्यादा सोना अमेरिका में निकाला जाता है. जी हां, दरअसल जब कोई देश अमेरिका से सोना खरीदना चाहता है, तो वो सिर्फ अपनी करंसी डॉलर में ही उसका भुगतान चाहता है. ऐसे में अन्य देशों को भी यह बात माननी होती है. हालांकि, डॉलर के पावरफुल होने के पीछे ये सिर्फ एक वजह है. ऐसी कई और वजहें भी हैं.

हथियार

जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया में हथियार बनाने वाली ज्यादातर बड़ी कंपनियां अमेरिका की ही हैं. दरअसल जब किसी देश को हथियार चाहिए होते हैं, तो अमेरिका पर निर्भर होता है. मालूम हो कि हथियारों के बदले अमेरिका को डॉलर में भुगतान किया जाता है.

तेल

मालूम हो कि इराक, ईरान सहित अरब देशों में तेल निकालने वाली कंपनियां ज्यादातर अमेरिकी हैं. जी हां, दरअसल यह कंपनियां डॉलर में ही भुगतान लेना पसंद करती हैं. इसके साथ ही शेल टेक्नोलॉजी से तेल उत्पादन करने के मामले में अमेरिका ही आगे हैं. आपको बता दें कि एक दशक पहले तक शेल टेक्नोलॉजी पर अमेरिकी की ही हुकूमत थी. इस वजह से डॉलर दुनिया की पावफुल करंसी है.

‘नेशनल डॉलर डे’

आपको बता दें कि 8 अगस्त को ‘नेशनल डॉलर डे’ मनाया जाता है. दरअसल ऐसा इसलिए क्योंकि 8 अगस्त 1786 के दिन ही वहां की सरकार ने अमेरिकी मौद्रिक प्रणाली स्थापित की थी. बता दें कि इसके 76 साल बाद 1862 में 1 डॉलर का पहला नोट छापा गया था.

मालूम हो कि शुरुआत में डॉलर पर जॉर्ज वाशिंगटन की जगह राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के अधीन रहे मुद्राकोष के सचिव सेलमोन पी. चैस की फोटो छपती थी. बता दें कि इस दिन को यादगार बनाने के लिए ‘नेशनल डॉलर डे’ घोषित किया गया.

कॉटन और लिनन से बनता है नोट

मालूम हो कि साल 1929 के पहले तक छपने वाले डॉलर का आकार आज के डॉलर की तुलना में बड़ा होता था. उसकी लंबाई 7.5 इंच और चौड़ाई 3 इंच होती थी. फिर साल 1929 में बिल में परिवर्तन करके उसका आकार छोटा किया गया. दरअसल अब उसी आकार का डॉलर छपता है. बता दें कि डॉलर को छापने के लिए कपड़े का प्रयोग भी होता है, जो कॉटन (75%) और लिनन (25%) से बना होता है.

एकमात्र महिला की फोटो

आपको यह भी बता दें कि अमेरिकी बैंक नोट के इतिहास में केवल एक बार महिला की फोटो छपी थी. जी हां, दरअसल वे थीं, जॉर्ज वाशिंगटन की पत्नी मार्था. मालूम हो कि 19वीं सदी के अंत में 1 और 2 डॉलर के नोट पर उनकी फोटो छपी थी. बाद में जॉर्ज वॉशिंगटन की फोटो छपी. कुल नोटों में 45% एक डॉलर के नोट होते हैं, जिनमें जॉर्ज वाशिंगटन नजर आते हैं.

100 डॉलर का नोट है ज्यादा पसंदीदा

जानकारी के लिए बता दें कि हर दिन लाखों डॉलर प्रतिदिन अमेरिका की प्रेस वॉशिंगटन मिंट में छपते हैं. जी हां, दरअसल अमेरिकी सरकार ने उत्पादन संबंधी परेशानियों के बावजूद 100 डॉलर का नया नोट जारी रखने की घोषणा कर रखी है.

मालूम हो कि वर्तमान समय में 100 डॉलर के 9 अरब नोट चलन में हैं, जिनमें से दो-तिहाई दूसरे देशों में हैं. बता दें कि कुल छपने वाले नोटों में 100 डॉलर के नोट 7% होते हैं. दरअसल इनका वितरण न्यूयॉर्क स्थित रिजर्व कैश ऑफिस से किया जाता है.

आपको बता दें कि इस पर बेन्जामिन की फोटो होती है, जो अमेरिका की स्थापना करने वालों में से हैं, जबकि दूसरी तरफ 10 डॉलर के नोट पर अलेक्जेंडर हेमिल्टन की फोटो होती है.

सबसे बड़ा नोट 1 लाख डॉलर का

मालूम हो कि साल 1934 में फेडरल नोट प्रेस ने 1 लाख डॉलर का नोट छापा था, जिस पर पूर्व राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन की फोटो नजर आती है. बता दें कि वह अब तक की सबसे ज्यादा कीमत वाला नोट था. जी हां, दरअसल इसे आम जनता से दूर रखते हुए रिजर्व बैंक के आंतरिक लेन-देन के लिए बनाया गया था. यही कारण था कि इसका उत्पादन मात्र 25 दिन तक किया गया.

पुराने डॉलर लिए जाते हैं वापस

आपको बता दें कि अमेरिका में बैंकों द्वारा उन नोटों को वापस ले लिया जाता है, जो कट-फट जाते हैं या ज्यादा पुराने हो जाते हैं. जी हां, दरअसल इस तहत हर साल वहां ऐसे करोड़ों नोट नष्ट किए जाते हैं. इसके अलावा छपाई में खामियों के कारण भी अमेरिका में नोटों को वापस ले लिया जाता है.

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