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आखिर आम लोग क्यों नहीं बजा पाते किन्नरों जैसी तालियां, जानिए क्यों होती है खास

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जब भी शादी-ब्याह या कोई उत्सव का माहौल होता है तो किन्नर वहां आ जाते है, नाचते गाते हैं और तालियां बजाकर दुआएं देते हैं. लेकिन आपने देखा होगा कि किन्नरों की ताली विशेष होती है. जबकि आम लोग ताली बजाते हैं तब बिल्कुल अलग आवाज आती है. उनकी ताली बजाने का अंदाज बहुत ही खास होता है. ताली बजाने के तरीके से ही किन्नर एक-दूसरे को पहचान लेते हैं.

बहुत से किन्नर स्त्रियों के कपड़ों में होते हैं तो वहीं कुछ किन्नर पुरुषों के कपड़े भी पहने होते हैं. लेकिन आपको बता दें कि अपने समुदाय में वह ताली बजाकर अपनी भावनाओं को जाहिर करते हैं. गुस्सा होने पर या खुशी में वह ताली बजाते हैं. किन्नरों का ताली बजाने का अनोखा तरीका होता है. आम ताली में दोनों हाथ वर्टिकल या होरिजेंटल होते हैं और उंगलियां आपस में लगभग जुड़ी होती है.

लेकिन किन्नर जब ताली बजाते हैं तो उनका एक हाथ वर्टिकल और एक हाथ हॉरिजॉन्टल तरीके से आपस में जुड़ता है और उनकी उंगलियां एकदम अलग रहती हैं. इसी वजह से उनकी ताली से जो आवाज निकलती है, वह काफी ऊंची होती है. कुछ सालों पहले समाजवादी पार्टी के नेता विशंभर प्रसाद निषाद ने कहा था कि किन्नर ताली बजाते हैं, इसी वजह से वह बीमार नहीं पड़ते. मैंने कभी किन्नरों को अस्पताल में इलाज कराते हुए नहीं देखा, क्योंकि ताली बजाना एक्यूप्रेशर थेरेपी की तरह काम करता है.

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किन्नर समुदाय के लोगों से जुड़े हुए कई तरह के किस्से हैं. इन लोगों को शारीरिक और मानसिक अवस्था जांच कर ही किन्नर समुदाय के साथ जोड़ा जाता है. यह लोग उत्सवों में जाकर नाच-गाना करके ही अपनी कमाई करते हैं. हालांकि अब बहुत से किन्नर नौकरी भी करने लगे हैं.

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